धनबाद, जेएनएन। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद झरिया की विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह के देवरों-पूर्व डिप्टी मेयर एकलव्य सिंह, हर्ष सिंह और अभिषेक सिंह पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मामला सत्ताधारी पार्टी की विधायक के रिश्तेदार से जुड़े होने के कारण पुलिस फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। दूसरी तरफ विधायक के माैसेरे देवर हर्ष सिंह ने पूरे मामले को राजनीतिक करार दिया है। उन्होंने कहा है कि झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह के इशारे पर फंसाया जा रहा है। 

पूर्व डिप्टी मेयर एकलव्य सिंह, उनके भाई अभिषेक सिंह उर्फ गुड्डू सिंह, मौसेरे भाई हर्ष सिंह, शेखर तिवारी व दो अन्य के खिलाफ रंगदारी मांगने की प्राथमिकी दर्ज की गई है। तपोवन कालोनी के ट्रांसपोर्टर मिथिलेश सिंह उर्फ सोनू सिंह की शिकायत पर शनिवार को सरायढेला थाना में केस दर्ज हुआ। मिथिलेश ने शुक्रवार को थाना में आवेदन देकर बताया था कि हर्ष सिंह हर माह उनसे पांच लाख रुपये रंगदारी मांग रहे हैं। शुक्रवार को ही काले रंग की स्कार्पियो से उनके कार्यालय में चार-पांच युवक आए और कर्मचारी से पूछताछ करने लगे। इनमें से एक शेखर तिवारी ने उनके सिर पर रिवॉल्वर सटा कर एकलव्य सिंह से बात करने को कहा। इसके बाद उसने अपने फोन से एक व्यक्ति से बात कराई। उसने अपना नाम एकलव्य सिंह बताया और कहा कि इतने दिन से हर्ष सिंह पैसा मांग रहा है। दे क्यों नहीं रहे हो? उसने अभिषेक सिंह का भी नाम लिया। पैसा नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी।

इधर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सरायढेला थाना की पुलिस शनिवार को मिथिलेश के कार्यालय पहुंची और सीसीटीवी फूटेज देखा। इसमें शेखर तिवारी की पहचान हुई, जबकि दो अन्य युवकों की पहचान नहीं हो सकी। प्रारंभिक जांच में पुलिस यह मानकर चल रही है कि कुछ तो हुआ है। दूसरी तरफ आरोपित हर्ष सिंह ने कहा कि मिथिलेश सिंह ने बदले की भावना से यह कार्रवाई की है। झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह के इशारे पर सारा खेल किया गया है। मिथिलेश पूर्व की भाजपा सरकार में सिंदरी यार्ड से कोयले का अवैध धंधा किया करता था। सरकार बदलने के बाद उसके कोयला से लदे चार वाहनों को बरवाअड्डा थाना क्षेत्र में उन्होंने पकड़वाया था। मिथिलेश ने एक साल पूर्व धैया के संजीव चौहान से एक हार्ड कोक भट्ठा खरीदा था। उसका सात लाख रुपया आज भी बकाया है। संजीव चौहान के देहांत के बाद भी वह उनके स्वजन को पैसा वापस नहीं कर रहा है। संजीव के परिवार वालों ने उनसे (हर्ष) संपर्क किया था। पैसा देने के लिए उन्होंने भी कई बार मिथिलेश को कहा था। हर्ष ने कहा कि मिथिलेश चाहे जितना भी केस दर्ज करा दे, उसका अवैध धंधा नहीं चलने देंगे।

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