नवजात की नाजुक स्थिति देख स्वजनों ने नर्सिग होम में किया हंगामा

चिरकुंडा : तालडांगा स्थित गुप्ता नर्सिंग होम में सोमवार की संध्या जुनकुंदर के नागरिकों ने नवजात बच्ची की नाजुक स्थिति होने की वजह से जमकर हंगामा मचाया। बच्ची के स्वजनों ने चिकित्सक के विरुद्ध मामला दर्ज कराने की बात कही। जुनकुदर निवासी 31 वर्षीय सुनीता देवी को 13 मई को डिलेवरी के लिए गुप्ता नर्सिग होम में भर्ती कराया गया था। वहां 14 मई को सुनीता को एक बच्ची हुई। इसके बाद स्वजन बच्ची की जांच कराने के लिए शिशु विशेषज्ञ को बुलाने की मांग की। चिकित्सक ने बच्ची को देखा। बच्ची दूध नहीं पी रही थी और उसके सिर में ट्यूमर की तरह फूल गया था। बच्ची के हाथ में भी दर्द था। तेज आवाज के साथ बच्ची रो रही थी।

स्वजनों ने बच्ची की नाजुक स्थिति को देखते हुए दूसरी जगह ले जाने की बात कही। उनका कहना था कि डा. एसके गुप्ता की ओर से नार्मल स्थिति बताकर दो दिन रख लिया गया। इससे बच्ची की स्थिती और बिगड़ गई। स्वजनों के दबाव पर डा. ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। बच्ची की नाजुक स्थिति देखकर स्वजन उसे मिशन अस्पताल ले गए। वहां जांच के बाद चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची को वैक्यूम सिस्टम से निकाला गया है। इसके नर्व दब गए हैं और बच्चा पैरेलाज्ड हो गया है। स्वजनों को जब यह पता चला तो उन्होंने गुप्ता नर्सिंग होम पहुंच कर हंगामा किया। डा. गुप्ता से मिलने को अड़े रहे। डा. गुप्ता ने मिलने से स्पष्ट इन्कार कर दिया। इससे बाद स्वजन और आक्रोशित हो गए। आखिरकार डा. गुप्ता व उनके पुत्र दोनों पहुंचे और स्वजनों से बातचीत की। स्वजनों ने उनकी बात से नाराज होकर उनके संस्थान और उनके विरुद्ध मामला दर्ज कराने की बात कही।

डा. गुप्ता ने बताया कि बच्ची की डिलेवरी हाई रिस्की प्रेग्नेंसी था। पेशेंट कई बीमारी से ग्रसित थी। एक मात्र नार्मल डिलेवरी ही उपाय था। उसमें बच्चे के नर्व्स दबते हैं पर फिजियोथेरेपी से सही भी हो जाता है। एक फिजियो थेरेपी हुआ और उसके बाद जबरन स्वजन डिस्चार्ज कराकर चले गए। उन्होंने कहा कि वैक्यूम का प्रयोग होता है पर चिमटा का उपयोग नहीं होता। आरोप निराधार है।

स्वजनों का का आरोप :

इधर स्वजनों ने कहा कि डिलेवरी के पूर्व अल्ट्रा सोनोग्राफी नहीं की गई। बच्चा के डाक्टर को बुलाने में भी समय लिया गया। व्यवस्था बहुत लचर है। नर्सिंग होम में अप्रशिक्षित कर्मियों की ओर से डिलेवरी कराई गई है। अभी तक डिस्चार्ज पेपर नहीं दिया गया है। यह साबित करता है कि चिकित्सक को उसकी गलती पता है। बच्ची के साथ बेरहमी की गई और लापरवाही बरती गई है जिस कारण वह पैरेलाइज्ड हो गई है।

Edited By: Jagran