जागरण संवादददाता, धनबाद : धनबाद में मवेशियों (गाय, बैल व भैंस) के बीच वायरल फूट एंड माउथ डिजीज (एपएमडी) यानी खुरहा और चपका बीमारी फैल रही है। जिले के ग्रामीण व शहरी इलाकों में यह बीमारी दुधारू मवेशियों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। शहरी इलाकों के खटालों में मवेशियों के बीच खुरहा का कुछ ज्यादा ही प्रकोप है। खटालों में इन दिनों तीन-चार दुधारू मवेशी खुरहा और चपका बीमारी की चपेट में आ गए हैं, जिससे पशुपालक परेशान हैं। वहीं, जिला पशुपालन विभाग के पास इस बीमारी से निपटने के लिए पर्याप्त वैक्सीन नहीं है।

इलाज को उपलब्ध नहीं वैक्सीन: मवेशियों को खुरहा व चपका की बीमारी से बचाने के लिए एफएमडी वैक्सीन आती है, जिसका पशुपालन विभाग में खासा अभाव है। विभाग में एफएमडी वैक्सीन की काफी कमी है। विभाग में मार्च से वैक्सीन नहीं है, जिससे मवेशियों को एफएमडी का टीका नहीं लगाया जा पा रहा है। पशुपालन विभाग में एफएमडी वैक्सीन ही नहीं कई और प्रकार दवाईयों की भी कमी है। स्वाइन फीवर (सुकर बुखार) की वैक्सीन एवं गला घोटू वैक्सीन, कृमि टैबलेट जैसी दवाइयों की खासी कमी है। स्वाइन फीवर वैक्सीन तो कब से खत्म है। इसके कारण पशुपालकों को मवेशियों के लिए बाजार से दवाई खरीदनी पड़ रही है।

क्या है खुरहा-चपका बीमारी: खुरहा व चपका बीमारी में मवेशियों के मुंह, मसूड़े व जीभ में छोटे-छोटे दाने उभर आते हैं और छाले पड़ जाते हैं। इसके अलावा पैर के खूरों में सूजन आ जाता है। इस बीमारी में मवेशियों को तेज बुखार आता है। दुधारू मवेशियों की दूध देने की क्षमता भी प्रभावित होती है। एफएमडी वैक्सीन लगाकर इस बीमारी से मवेशियों का बचाव किया जा सकता है।

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पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर पशु चिकित्सा शिविर लगाया जाता है। सितंबर में एफएमडी के वैक्सीनेशन के लिए पूरे जिले में वृहद अभियान चलाया जाएगा। गला घोटू बीमारी की पर्याप्त दवाई उपलब्ध है।

सिद्धार्थ जयसवाल, जिला पशुपालन पदाधिकारी, धनबाद।

Posted By: Jagran

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