अश्विनी रघुवंशी, धनबाद। सुबह की सैर के दौरान न्यायाधीश उत्तम आनंद आटो की टक्कर से मारे गए। उनकी अदालत में किसी अपराधी के साथ मुरव्वत नहीं हुई, चाहे माओवादी क्यों न हो। एडीजी संजय आनंद लाटकर के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई। आटो चुराया गया था। टक्कर मारने में तीन सोनार पकड़े गए। आटो मालिक लोहार था। वह भी धराया। तीन सोनार और एक लोहार ने एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी, सिटी एसपी समेत डेढ़ सौ खाकीवालों की तीन रातों की नींद हराम कर दी। इस मसले पर उच्चतम न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट की टिप्पणी ने शासन को शर्मसार किया। विरोधी भी सीबीआई जांच का शोर मचा रहे थे। सो, झारखंड सरकार सीबीआई जांच को मान गए। अब न्यायालय में सीबीआई जवाब देगी। वैसे, महाराष्ट्र आईटीएस में रह चुके संजय आनंद लाटकर ऐसा अनुसंधान चाहते हैैं कि सीबीआई को मेहनत नहीं करनी पड़े। सच बहुत दूर नहीं है।

कोयला चाहिए तो यहां आइए

यह कोयला राजधानी है। कोयला है तो कमाई है। सबकी। बीसीसीएल और ईसीएल की खदानें हैैं। सार्वजनिक उपक्रम को कमाना है और वहां काम करने वाले लोगों को भी। जनप्रतिनिधि, नौकरशाह, कारोबारी, व्यापारी से लेकर हर किसी को कुछ न कुछ चाहिए। सरकारी साहब बदलते हैैं तो कोयला के काले कारोबार का तरीका भी बदल जाता है। कुछ लोग रिसॉर्ट में डेरा-डंडा डाले हुए है। प्रति टन दो हजार का वायदा कीजिए। कहां से काले धंधे का कोयला उठाना है, किधर से गाड़ी गुजरेगी, हिसाब किताब कैसे होगा, सारी विवरणी मिल जाएगी। पहले साहब का पेट भर जाएगा तो बाकी लोगों को भी कुछ न कुछ हिस्सा जरूर बंट जाएगा। न कोई लफड़ा नहीं, न किसी तरह की प्रतिद्वंद्विता। बिल्कुल सामाजिक न्याय है। चाहे किसी भी जाति-धर्म से हो, सबके लिए एक ही नियम कायदा है। देरी क्यों। ब्लैक डायमंड आपका इंतजार कर रहा है।

निदेशक के लिए उड़ो दिल्ली

केंद्रीय ईंधन एवं अनुसंधान संस्थान (सिंफर) का निदेशक का निकट भविष्य में चयन होना है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की संचिकाओं में सिंफर के वर्तमान निदेशक डाक्टर प्रदीप सिंह की उपलब्धियों की लंबी सूची पहले से पड़ी हुई है। जाहिर है, अधिकतर लोग यकीन कर रहे हैैं कि बतौर निदेशक उन्हें एक और कार्यकाल मिल सकता है। वैसे, लोकतंत्र में हरेक कुर्सी के लिए साम, दाम, दंड, भेद की नीति चाणक्य काल के पहले से अपनाई जाती रही है। कुर्सी के लिए कुछ मुख्य वैज्ञानिक दिल्ली की उड़ान भर रहे हैैं। प्रदीप सिंह के 'भौकाल की खदानÓ की हवा बाहर निकालने के जतन में लगे हैैं। रांची से दिल्ली तक उड़ान भरी जा रही है। संपर्क सूत्र खोजे जा रहे हैैं, विशेष कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भाजपा में। कभी निदेशक की दौड़ में पीछे रह चुके लोग भी इस मुहिम में पीछे नहीं है।

लोटा लाओ, लुंगी पकड़ाओ

ऐसा मानसून आया कि दर्जनों पेड़ उखड़ गए। सैकड़ों घरों में पानी घुस गए। फ्लैट में आधी कारें डूब गईं। तीन दिन बिजली गुल। सरकारी जलापूर्ति भी बंद। इनवर्टर भी धोखा दे दिए। बोङ्क्षरग होने पर भी बिजली नहीं रहने से अधिकतर घरों की पानी टंकी खाली रही। दिव्य निपटान, नहाने, खाना बनाने से बर्तन धोने तक दिक्कत ही दिक्कत। सिर्फ बारिश होती रही। आवास बोर्ड की कालोनी में अच्छे परिवारों की महिलाएं सरकारी चापाकलों पर दंत मंजन करती दिखी। धैया के रामप्रवेश के घर में बिल्कुल पानी नहीं था। हल्की बारिश में भी पत्नी को आवाज लगाई, लुंगी लाओ, लोटा पकड़ाओ। किसी तरह फारिग होकर आए तो चेहरे पर राहत दिखी। बीसीसीएल के मुख्यालय कोयला नगर का दृश्य भी अलग न था। दो दिन बिजली गुल रही। कर्मचारियों के साथ साहब भी अंधकार में। मानसून ने सबके साथ समान न्याय किया। सो, प्रकृति को ख्याल रखे।

 

Edited By: Mritunjay