बरवाअड्डा (धनबाद) : बरवाअड्डा के मरिचो गाव में रविवार रात हाथियों ने जमकर उत्पात किया। वहां दो घटे के दौरान लगभग 24 हाथियों के दल ने दर्जनों मकान को ध्वस्त कर लाखों की संपति नष्ट कर दी। हाथियों ने ग्रामीणों के घर के साथ अंदर रखे बर्तन, पलंग, खटिया, साइकिल, बक्शा आदि भी तोड़ डाला। खेत में लगे मकई, केला अरहर, बैगन आदि के साथ घर में रखे चावल, दाल, आटा भी खा गए। हाथियों के उपद्रव से गांव में हड़कंप मच गया। लोग घर-बार छोड़कर भाग निकले। पूरी रात ग्रामीणों ने घरों से अलग दूर जंगलों में छिपकर जान बचाई। घटना की सूचना पाकर मौके पर जब फ ोरेस्टर राजकुमार प्रसाद पहुंचे तो आक्रोशित ग्रामीणों ने तीन उन्हें बंधक बना लिया। तीन घंटे तक उन्हें बंधक बनाकर रखा गया। इसके बाद रेंजर अजय मंजुल दलबल के साथ पहुंचे और क्षतिग्रस्त मकान एवं नष्ट फ सलों को देखकर ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि जल्द ही प्रभावितों को मुआवजा दिलाया जाएगा। मंजुल ने बताया कि 31 प्रभावित लोगों ने आवेदन दिया है। जिसमें 14 लोगों का मकान क्षतिग्रस्त हुआ है एवं 17 लोगों का फ सल नष्ट हुआ है। उन्होंने बताया कि बोकारो और तोपचाची की दो टीम को मरिचो गाव भेजा गया है। यदि दुबारा हाथियों की झुड गाव में पहुंचता है तो उसे खदेड़ कर जंगल भेज दिया जाएगा। इस संबंध में विधायक फू लचंद मंडल ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर डीएफ ओ से बात की है। जल्द ही प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा दिलाया जाएगा। जिप सदस्य अशोक कुमार सिंह भी गाव पहुंचे और प्रभावित लोगों से बातचीत की और जरुरुतमंदो के बीच चावल-आटा का वितरण किया।

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ये हैं प्रभावित :

भीम महतो, सरवेश्वर महतो, मुलिया देव्या, राधु महतो, सरफु द्दीन अंसारी, सलीम अंसारी, राजु महतो, मेमुन खातुन, अली मोहमद अंसारी, मजीद अंसारी, सफु रन बीबी, मैमुन बीबी, फि रोजा खातुन, ईजारत अंसारी, अली हुसैन, हलीम अंसारी, शफ क अंसारी, युनुस अंसारी, जलील अंसारी, खलील अंसारी, हजरत अंसारी, असगर अंसारी, शमसुद्दीन अंसारी, शहादत अंसारी , शेखावत अंसारी, हैदर अंसारी, सलीमुद्दीन अंसारी, बलाल अंसारी, शमशेर अंसारी, अयूब अंसारी।

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मेरे बाप के नहीं हैं हाथी

हाथियों के उपद्रव की जानकारी पाकर जब फॉरेस्टर राजकुमार प्रसाद के नेतृत्व में वनकर्मी जब गांव पहुंचे तब ग्रामीण उनसे शिकायत करने लगे। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने पहले ही हाथियों के आने की सूचना दे दी थी लेकिन वन विभाग ने बचाव का प्रबंध नहीं किया। ग्रामीण वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाने लगे। इस पर किसी वनकर्मी ने कह दिया कि हाथी उनके बाप के नहीं है। इसपर ग्रामीण भड़क गए और फॉरेस्टर समेत वनकर्मियों को बंधक बना लिया। वरीय पदाधिकारियों के समझाने पर उन्हें छोड़ा गया।

Posted By: Jagran

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