गोविन्द नाथ शर्मा, झरिया : वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी जानलेवा लहर की चपेट में आकर हर दिन धनबाद जिले में दर्जनों लोग असमय मौत के शिकार हो रहे हैं। जिले के श्मशान घाटों में शवों के अंतिम संस्कार के लिए मृतक के स्वजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

कोरोना संक्रमित शवों का भी यहां अंतिम संस्कार किया जा रहा है। ऐसे में कोरोना के और फैलने की संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए पिछले दिनों धनबाद के नगर आयुक्त ने मोहलबनी क्षेत्र का दौरा कर यहां एक ही स्थान पर कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार सरकारी गाइडलाइन के अनुसार का आदेश भी दिया है।

लेकिन सरकार, जिला प्रशासन व नगर निगम की उपेक्षा के कारण जिले का एकमात्र मोहलबनी का विद्युत शवदाह गृह जर्जर अवस्था में बंद पड़ा है। कोरोना संक्रमित व अन्य शवों का अंतिम संस्कार जैसे-तैसे दामोदर नदी के किनारे ही किया जा रहा है। शुरू से ही इस विद्युत शवदाह गृह का संचालन सही से किया जाता तो आज यह स्थिति नहीं होती। जिले का एकमात्र विद्युत शवदाह गृह 23 वर्षों से जर्जर होकर बंद पड़ा नहीं होता।

56 लाख की लागत से बना था मोहलबनी का विद्युत शवदाह गृह : 

एकीकृत बिहार राज्य के समय खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार व धनबाद डेवलपमेंट फोरम के सौजन्य से लगभग 56 लाख रुपये की लागत से मोहलबनी विद्युत शवदाह गृह का शिलान्यास दामोदर नदी के पास 1992 में तत्कालीन उपायुक्त व्यास जी ने किया था। विद्युत शवदाहगृह का सबसे पहले उद्घाटन 14 नवंबर 1997 को बिहार के नगर विकास मंत्री श्रीनारायण यादव व ग्रामीण विकास राज्य मंत्री आबो देवी ने संयुक्त रूप से किया था। मौके पर धनबाद के डीसी बाला प्रसाद, माडा के एमडी मो सनाउल्लाह, तकनीकी सदस्य रामबालक प्रसाद सिंह आदि मुख्य रूप से शामिल हुए थे।

1998 में विवाद के बाद प्रशासन ने बंद कर दिया था विद्युत शवदाह गृह :

 अक्टूबर 1998 में यहां शव को जलाने और नहीं जलाने के भारी विवाद के बाद प्रशासन ने इसे बंद कर दिया।  एक वर्ष चलने के बाद एक दिन लोदना से शव का अंतिम संस्कार के लिए लोग विद्युत शवदाह गृह पहुंचे। उस समय यहां बिजली नहीं थी। विद्युत शवदाह गृह में तैनात झमाडा के कर्मियों ने शव को जलाए बिना उसे पीछे रख दिया। काफी देर बाद शव जलाने आए लोगों से कहा कि बिजली आ गई है। शव को जला दिया गया है। कर्मी शव का राख भी मृतक के परिवार वालों को दे दिया। इसी बीच मृतक परिवार का एक व्यक्ति पीछे गया तो देखा कि शव पड़ा हुआ है। इसके बाद लोगों ने कर्मी की पिटाई कर उस पर शवों की तस्करी करने के गंभीर आरोप लगाए। विवाद बढ़ने के कारण प्रशासन ने इसे बंद कर दिया। 

2005 में उपायुक्त बीला राजेश ने दुबारा किया था शवदाह गृह का उद्घाटन :

 22 दिसंबर 2005 को धनबाद की तत्कालीन उपायुक्त बीला राजेश ने दोबारा इस विद्युत शवदाह गृह का उद्घाटन किया। मौके पर बीसीसीएल के वरीय अधिकारी डीसी गर्ग, टिस्को जामाडोबा कोलियरी के जीएम मुख्य रुप से शामिल हुए। लेकिन बिजली की कमी के कारण कुछ माह बाद विद्युत शवदाह गृह फिर बंद हो गया। 

धनबाद नगर निगम बोर्ड की बैठक में कई बार इसे चालू करने का उठाया गया मामला : 

 वर्ष 1998 से बंद मोहलबनी के विद्युत शवदाह गृह को चालू कराने के लिए वर्ष 2015 में तत्कालीन स्थानीय पार्षद चंदन महतो ने कई बार धनबाद नगर निगम बोर्ड की बैठक में मामला उठाया। तत्कालीन मेयर 

चंद्रशेखर अग्रवाल को बताया था कि विद्युत शवदाहगृह की उपेक्षा के कारण यह जर्जर हो गया है। यहां के गेट, दरवाजा, खिड़की, जेनरेटर व अन्य सामानों की चोरी हो चुकी है। इसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है। मेयर गंभीर नहीं हुए। अब विद्युत शवदाह गृह काफी जर्जर हो गया है। 

इनके ऊपर थी  विद्युत शवदाह गृह के संचालन की जिम्मेवारी :

 मोहलबनी विद्युत शवदाह गृह का दोबारा जब तत्कालीन उपायुक्त बीला राजेश ने चालू किया था। उस समय इसके निर्बाध संचालन के लिए मोहलबनी विद्युत शवदाह गृह संचालन समिति का गठन किया था। समिति में जिला प्रशासन के अलावा  बीसीसीएल, टिस्को, झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड, खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार के अधिकारियों को रखकर संचालन व देखरेख की जिम्मेवारी सौंपी गई  थी। था। लेकिन उपायुक्त ब…