जागरण संवाददाता, धनबाद: लगातार 24 घंटे हुई बरसात और बिजली कटौती ने जलापूर्ति व्यवस्था को भी ठप कर दिया। पूरा शहर भले ही पानी पानी हो गया, लेकिन घरों में लोग एक एक बूंद के लिए तरस गए। पीने का पानी तो छोड़िए लोगों को दैनिक क्रिया में भी खूब परेशानी हुई।

बिजली कटौती का खामियाजा यह हुआ कि शहर में जलापूर्ति करने वाले सभी 19 जलमीनार खाली रह गए। शुक्रवार सुबह 10 बजे से भेलाटांड़ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का मोटर बंद है। सुबह 10 बजे जो बिजली कटी वह अभी तक नहीं आई है। इसकी वजह से मोटर नहीं चल सका।

19 जनपदों में एक बूंद पानी नहीं है पिछले 24 घंटे से शहर के 4:30 लाख की आबादी प्यासी है। अभी बिजली आ भी जाती है तो शाम से पहले पानी नहीं मिलेगा, क्योंकि एक जलमीनार को भरने में चार से पांच घंटे का समय लगता है। सिर्फ यही नहीं वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में जल शोधन भी किया जाएगा, इसके बाद ही जलापूर्ति होगी।

आज शाम अगर जलापूर्ति होती भी है तो आठ से 10 टंकियां ही भरी जा सकेंगी। यह भी बिजली पर निर्भर है। सभी 19 जलमीनार पर लगभग साढ़े चार लाख की आबादी आश्रित है। सबसे अधिक स्टील गेट, हीरापुर और पुलिस लाइन जलमीनार से जलापूर्ति होती है।

यहां बता दें कि पेयजल विभाग 19 जलमीनारों के जरिए शहरी क्षेत्र की साढ़े चार लाख की आबादी को जलापूर्ति करता है। अभी पिछले माह ही पाइपलाइन शिफ्टिंग की वजह से पांच प्रमुख जलमीनारों में एक दिन जलापूर्ति बाधित थी। इससे पहले भेलाटांड़ के पास पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की वजह से तीन दिनों तक जलापूर्ति बाधित थी।

इन जलमीनारों से होती है जलापूर्ति

स्टीलगेट, हीरापुर, पुराना बाजार, भूदा, बरमसिया, मेमको मोड़, पॉलीटेक्निक, गांधी नगर, एसएनएमएमसीएच, धोवाटांड़, धनसार, भूली, मटकुरिया, वासेपुर, चिरागोड़ा, हिल कॉलोनी, मनईटांड़, पुलिस लाइन, गोल्फ ग्राउंड।

वर्जन

पेयजल समस्या बनी हुई है। शुक्रवार सुबह 10 बजे से बिजली नहीं है। इस वजह से मोटर नहीं चल सका है। वैकल्पिक व्यवस्था है नहीं, बिजली पर ही निर्भरता है। बिजली आते ही पानी टंकियों में भरने का काम शुरू हो जाएगा। उम्मीद है आज शाम तक कुछ टंकियां से जलापूर्ति शुरू हो जाए।

- राहुल प्रियदर्शी, सहायक अभियंता पेयजल विभाग

Edited By: Atul Singh