धनबाद, जेएनएन। शाम के तकरीबन चार बजे हैं। गोल्फ ग्राउंड गेट से सटे मनोज की चाय दुकान के बाहर लोग हल्की धूप के बीच चाय की चुस्की ले रहे हैं। कुछ बुजुर्ग बैठकर चुनावी गपशप भी कर रहे हैं। कह रहे हैं कि शहर में विकास तो हुआ पर अभी इसकी और बहुत गुंजाइश है। सभी के बीच विधानसभा सीटों पर चर्चा हो रही है। यहां नेताओं के राष्ट्रीय पार्टी छोड़कर स्थानीय राजनीतिक दलों में शामिल होने का मुद्दा भी हावी है।

इस बीच रवींद्र ओझा एकाएक बोल पड़ते हैं कि जाए दीजिए, खड़ा तो बहुते होगा, लेकिन टक्कर कांग्रेसे-बीजेपी के बीच रहेगा। साथ बैठे पंडित बालेश्वर तिवारी कहते हैं कि ठीके कह रहे हैं। ई छोटकन पार्टी सब शहर में कुछ न कर सकेगा। उन दोनों की सुन रहे एसके वर्मा कहते हैं कि शहर का रूप तो काफी हद तक बदल गया है। कुछ ही हिस्से में सही पर रंग-बिरंगी रोशनी से सड़कों की रौनक बढ़ गई है। काम तो हुआ है। इसका असर चुनाव में भी जरूर दिखेगा।

बुजुर्गो की बातें सुन रहे दो युवा चंदन कुमार और अनुभव भी कह उठे कि पांच सालों में कुछ बदले न बदले पर बेकारबांध जरूर बदल गया है। शहर के लोगों को शाम का वक्त बिताने को अच्छी जगह मिल गई है। एक अच्छे और सुसज्जित पार्क की जरुरत इस शहर को थी जो मिल गई है। जीत किसी की भी हो और सरकार कोई बनाए, पर पब्लिक फैसलिटी का ख्याल रखा जाए। जो जनता के हित में काम करे उसे चुनाव में अवश्य मौका देना चाहिए। 

Posted By: Sagar Singh

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