धनबाद [जागरण स्‍पेशल]। गैंग्‍स ऑफ वासेपुर फिल्‍म तो आपने देखी ही होगी। दो पार्ट में रिलीज की गई इस फिल्‍म ने रातों-रात धनबाद के वासेपुर को सुर्खियों में ला दिया। गैंग्स ऑफ वासेपुर 1947 से 2004 के बीच बनते बिगड़ते वासेपुर की कहानी है, जहां कोल और स्क्रैप ट्रेड माफिया का जंगल राज है। कहानी दो बाहुबली परिवारों पर आधारित है, जिसमें बदले की भावना, खून खराबा, लूट मार की भरमार है। जल्‍द ही फिल्‍म के लेखक जीशान कादरी इसके तीसरे पार्ट गैंग्‍स ऑफ वासेपुर 1.5 को लेकर आ रहे हैं। हालांकि उससे पहले हम आपको वासेपुर की एक और कहानी सुनाते हैं, जिसमें एक्‍शन कम और रोमांच अधिक है।

वासेपुर: ऐसा मुहल्‍ला, जहां बेटियों को नहीं ब्‍याहना चाहते लोग

फिल्‍म गैंग्‍स ऑफ वासेपुर रिलीज होने के बाद धनबाद के इस मुहल्‍ले की छवि इस कदर बदनाम हुई कि लोग यहां अपनी बेटियों को ब्‍याहने से कतराने लगे। यहां रहनेवाले हर शख्‍स में दूसरों को डॉन और माफिया ही नजर आता था। लेकिन सच्‍चाई तो यह है कि इस मुहल्‍ले के भी कई रंग हैं। इस मुहल्‍ले की एक गली कमर मखदुमी रोड से ही पूरे मुहल्‍ले की पहचान है। फिल्‍म के लेखक जीशान कादरी यहीं रहते हैं तो वहीं फैजल खान का किरदार जिस डॉन फहीम खान से प्रभावित है, वह भी इसी मुहल्‍ले का रहनेवाला है। इन सबके अलावा धनबाद के इस मुहल्‍ले में रहकर ही अबू इमरान ने यूपीएससी की परीक्षा पास की और अभी बतौर आइएएस झारखंड में सेवा दे रहे हैं। 

जीशान कादरी, जिन्‍होंने गैंग्‍स ऑफ वासेपुर को बुना

सबसे पहले बात करते हैं उस शख्‍स की, जिन्‍होंने गैंग्‍स ऑफ वासेपुर के तीनों पार्ट (दो रिलीज हो चुके हैं और तीसरे पर काम चल रहा है) की कहानी लिखी। फिल्‍म के दूसरे पार्ट में उन्‍होंने एक्‍टिंग भी की। उनके किरदार डेफिनिट को लोगों ने खूब पसंद किया। फिल्‍म के अंत में डेफिनिट फैजल खान की हत्‍या कर देता है। इसके अलावा मेरठिया गैंग्‍सटर्स फिल्‍म जीशान ने डायरेक्‍ट और प्रोड्यूस की है। इंजीनियर सय्यद इमरान कादरी के इकलौते पुत्र जीशान दो बहनों से छोटे हैं। बीबीए की पढ़ाई के लिए वे धनबाद छोड़कर मेरठ गए और यहीं उन्‍हें मेरठिया गैंग्‍सटर्स की कहानी मिली। इसके बाद दिल्‍ली में उन्‍होंने कॉल सेंटर में काम किया। फिर 2009 में मुंबई आ गए। जीशान एक्‍टिंग में करियर बनाने के लिए मुंबई आए थे। कंगना रनौत की फिल्‍म रिवॉल्‍वर रानी में भी उन्‍होंने काम किया है। इसके अलावा मधुर भंडारकर की फिल्‍म मैडमजी की स्‍क्रिप्‍ट पर जीशान काम कर रहे हैं। फिल्‍म में चोपड़ा प्रियंका मुख्‍य किरदार निभाती नजर आएंगी।

फैजल खान यानी डॉन फहीम खान

जीशान की फिल्‍म गैंग्‍स ऑफ वासेपुर पार्ट 2 का मुख्‍य किरदार फैजल खान जिस डॉन से प्रभावित था, वह है वासेपुर निवासी  फहीम खान। फिल्‍म में फैजल खान को डेफिनिट मौत के घाट उतार देता है, लेकिन असल जिंदगी में फहीम अभी जमशेदपुर जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। जेल में बंद होने के बावजूद उसके नाम पर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने की कहानी सामने आती रहती है। कुछ दिनों पहले झारखंड विकास युवा मोर्चा के धनबाद जिलाध्‍यक्ष रंजीत सिंह की हत्‍या में भी फहीम खान का नाम सामने आया था। हालांकि फहीम खान खुद को डॉन नहीं मानता। फहीम खान का कहना है कि वह गैंगस्टर नहीं है। उसने कभी चोरी नहीं की, कोई डकैती या रेप नहीं किया। वह तो बस अपनी मां और मौसी की हत्या का इंतकाम लेने के रास्ते पर चल रहा था। मालूम हो कि 18 अक्तूबर 2004 को फहीम की मां व मौसी की हत्या कर दी गई थी। अभी फहीम के भांजे डर का कारोबार चलाते हैं।

आइएएस अबू इमरान: तय किया धनबाद से यूपीएससी तक का सफर

इसी गली में एक घर ऐसा भी है, जहां से निकलकर अबू इमरान ने यूपीएससी की परीक्षा पास की और आइएएस बने। 2010 बैच के आइएएस अबू इमरान ने आरंभिक पढ़ाई वासेपुर में करने के बाद एएमयू और जेएनयू की राह पकड़ी। इससे पहले 2008 में इमरान आइआरएस चुने गए थे। अबू इमरान उस दौरान चर्चा में आए, जब इनके परिवार ने कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की और रघुवर सरकार पर इमरान के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। अबू उस समय गृह विभाग में संयुक्‍त सचिव के पद पर सेवा दे रहे थे। परिवार का आरोप था कि इमरान को दरकिनार किया जा रहा है। उससे पहले इमरान ने लातेहार में बतौर एसडीओ और रामगढ़ में बतौर डीसी अपनी सेवा दी थी।

Posted By: Deepak Pandey

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