विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

धनबाद जिला परिषद में फिर बवाल, अध्यक्ष ने सीईओ को दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

By Balwant Kumar Edited By: Mritunjay Pathak
Published: Wed, 08 Apr 2026 02:25 PM (GMT+05:30)

Dhanbad Zila Parishad Controversy: धनबाद जिला परिषद में एक बार फिर विवाद गहरा गया है। अध्यक्ष शारदा सिंह ने मुख्य ...और पढ़ें

जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह और डीडीसी सन्नी राज।

जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह और डीडीसी सन्नी राज।

जागरण संवाददाता, धनबाद। Dhanbad Zila Parishad Controversy: एक बार फिर से जिला परिषद धनबाद में बवाल मचा हुआ है। यह दूसरी बार है कि जिला परिषद अध्यक्ष को ही अपनी संस्था के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा है। अध्यक्ष शारदा सिंह ने इस बार अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाते हुए जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सह उपविकास आयुक्त सन्नी राज को पत्र लिखा है और अपने वैधानिक अधिकारों और शक्तियों के संरक्षण की मांग की है।

यह है मामला

अध्यक्ष शारदा सिंह ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेदों का हवाला देते हुए बताया है कि उन्हें व्यापक प्रशासनिक, वित्तीय और निगरानी संबंधी अधिकार प्राप्त हैं। उन्हें बैठक बुलाने और कार्यसूची निर्धारित करने का अधिकार है। जिला परिषद के कार्यों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण की शक्ति भी मिली हुई है।

वित्तीय मामलों और व्यय की स्वीकृति में अध्यक्ष की भूमिका अनिवार्य है। राज्य सरकार व जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना उनकी प्रमुख जिम्मेवारी है। उन्होंने आग्रह किया है कि इन संवैधानिक प्रावधानों के आलोक में अध्यक्ष के अधिकारों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी परिस्थिति में उनका अतिक्रमण न होने दिया जाए।

कहा कि यदि अधिकारों की अवहेलना या पद की गरिमा का हनन को विधि विरुद्ध माना जाएगा और वे आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगी।

इसके पूर्व भी लगाया था भ्रष्टाचार का आरोप

इसके पूर्व भी जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह बड़ा खुलासा करने का दावा किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि परिषद में अधिकारी और कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं। विशेष रूप से उनका आरोप जिला अभियंता और यहां के लिपिकों को लेकर था। उन्होंने यह भी कहा कि यहां के अधिकारी नहीं सुधरे तो वे बड़ृा खुलासा करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

उपाध्यक्ष ने की थी तालाबंदी

जिला परिषद उपाध्यक्ष सरिता देवी ने भी संस्थान पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अपने समर्थकों संग यहां की तालाबंदी भी की थी। उनका आरोप था कि अधिकारी और कर्मचारी किसी भी मामले की जानकारी उन्हें नहीं देते।