विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UPI Payment अब पड़ेगा भारी? Charge को लेकर धनबाद के व्यापारियों में नाराजगी, समझें पूरा गणित

Published: Wed, 16 Sep 2026 07:21 PM (IST)

Merchant Discount Rate: धनबाद के व्यापारी और राजनीतिक संगठन UPI डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने के NPCI के फैसले का विरोध कर रहे हैं।

UPI से पमेंट पर मर्चेंट से शुल्क वसूलने का व्यापारी कर रहे विरोध। (प्रतीकात्मक फोटो)

UPI से पमेंट पर मर्चेंट से शुल्क वसूलने का व्यापारी कर रहे विरोध। (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. धनबाद के व्यापारी UPI भुगतान पर शुल्क लगाने का विरोध कर रहे हैं।

  2. उनका मानना है कि इससे खुदरा व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

  3. सरकार से इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने की अपील की गई है।

जागरण संवाददाता, धनबाद। National Payments Corporation of India (NPCI) की ओर से UPI (Unified Payments Interface) के माध्यम से होने वाले डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने की खबरों के बाद धनबाद के व्यापारी वर्ग और राजनीतिक संगठनों में गहरा असंतोष है।

लोगों का कहना है कि पहले से ही आनलाइन व्यापार के कारण खुदरा बाजार भारी मंदी और दबाव से जूझ रहा है। ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क थोपना पूरी तरह से अनुचित है और इससे पारदर्शी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के प्रयासों को झटका लगेगा।

शुल्क लागू होने से डिजिटल माध्यमों से लोग होंगे दूर 

व्यापारी प्रमोद गोयल ने इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान पूरी तरह से शुल्क मुक्त होना चाहिए, क्योंकि यह सरकार के नोट छापने और उनके वितरण के भारी-भरकम खर्च को काफी कम करता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर शुल्क लगाने के बजाय इसे प्रोत्साहित और पुरस्कृत करना चाहिए। यदि इस तरह का शुल्क लागू किया जाता है तो लोग डिजिटल माध्यमों से दूर होने लगेंगे और देश में पुन नकद भुगतान की प्रवृत्ति बढ़ने लगेगी। पूरे विश्व में सराहे गए इस सफल डिजिटल प्रयास को असफल करने की दिशा में कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।

वहीं धनबाद जिला कांग्रेस व्यापार एवं उद्योग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष प्रभात सुरोलिया ने इस निर्णय को तुगलगी फरमान करार देते हुए कहा कि सरकार ने पहले डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देकर व्यापारियों को यूपीआई अपनाने के लिए प्रेरित किया। अब 2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन पर शुल्क की वसूली करना व्यापारियों के साथ अन्याय है।

अतिरिक्त शुल्क से कारोबारियों की लागत बढ़ेगी जिससे पहले से ही दबाव झेल रहे व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि व्यापारियों की मेहनत की कमाई पर इस नई वसूली को तुरंत वापस लिया जाए और उन्हें राहत तथा सुविधा प्रदान की जाए।

बैक मोड़ चेंबर के अध्यक्ष प्रमोद गोयल ने बताया कि रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में नोट छपाई पर 6,372 करोड़ से अधिक का खर्च आया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है।

इसके अलावा नोटों की सुरक्षा, ढुलाई और रखरखाव में भी हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। जब डिजिटल भुगतान से सरकार का यह विशाल खर्च बचता है तो ऐसे में यूपीआई पर शुल्क लगाना सरकार और आम जनता दोनों के लिए नुकसान का सौदा साबित होगा।

क्या है विवाद 

UPI के माध्यम से पेपेंट पर अभी जो देश में चर्चा शुरू हुई है, वह MDR (Merchant Discount Rate) यानी मर्चेंट से शुल्क वसूलने का है। 15 सितंबर 2026 को NPCI ने नया ढांचा घोषित किया है, जिसके बाद यह मुद्दा चर्चा में है।

अधिकतम सीमा 300 रुपये 

15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के P2M (ग्राहक से दुकानदार) UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। सामान्य लेन-देन में इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी।

ग्राहक पर नहीं लगेगा कोई चार्ज 

यह ग्राहक पर लगाया जाने वाला UPI चार्ज नहीं है। शुल्क मर्चेंट/व्यापारी पक्ष पर लागू होगा। P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किया गया UPI भुगतान निःशुल्क रहेगा। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन जैसी कुछ श्रेणियों के लिए अलग फ्लैट MDR का प्रावधान है।

सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और तकनीकी विकास की लागत को टिकाऊ तरीके से पूरा करने के लिए है।

कारोबारियों की चिंता 

व्यापारी संगठनों और कुछ वित्तीय कारोबारियों की चिंता है कि MDR उनकी लागत बढ़ाएगा। उनका कहना है कि अगर व्यापारी यह लागत ग्राहक से वसूलने की कोशिश करते हैं तो UPI भुगतान महंगा पड़ सकता है और कुछ छोटे व्यापारी नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है।

सबसे महत्वपूर्ण बात

अभी इसे ऐसे समझना गलत होगा कि ₹2,000 से ज्यादा UPI करने पर ग्राहक से 0.4% टैक्स कटेगा। मौजूदा घोषणा में MDR मर्चेंट पक्ष का शुल्क है, ग्राहक का UPI टैक्स नहीं।