धनबाद के छात्रों ने बनाया AI-IoT स्मार्ट सिस्टम: पानी बढ़ते ही खुद चालू होगा पंप, खेतों को जलभराव से बचाएगा
DAV Public School Dhanbad के छात्रों ने एआई और आईओटी आधारित 'स्मार्ट क्रॉप सर्वाइकल सिस्टम' बनाया है।

खेतों में जलभराव से फसल होता नुकसान। (प्रतीकात्मक फोटो)
आशीष सिंह, धनबाद। Smart Crop Survival System खेतों में जलभराव की समय रहते जानकारी न मिल पाना किसानों के लिए चुनौती रहा है। धनबाद के डीएवी पब्लिक स्कूल कोयला नगर के छात्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) और इंटरनेट आफ थिंग्स (आइओटी) तकनीक पर आधारित इनोवेटिव स्मार्ट क्राप सर्वाइकल सिस्टम तैयार किया है।

यह सिस्टम खेत में जरूरत से अधिक पानी जमा होते ही स्वतः पंप चालू कर निकाल देता है। इस प्रोजेक्ट को डीएवी की 10वीं की छात्रा अंकिता श्रीवास्तव और नौवीं के रौनक व अनन्या ने मिलकर तैयार किया है।
अंकिता ने बताया बारिश और जलभराव से फसलों के नुकसान की समस्या का तकनीकी समाधान खोजने के लिए रिसर्च शुरू किया। यह तकनीक खेतों में होने वाले जलभराव को रोकने में सक्षम होगी।
खेत के अलग-अलग हिस्सों में स्वायल माइश्चर सेंसर्स लगाए जाते हैं, जो मिट्टी की नमी मापते हैं। साथ ही रेन सेंसर वर्षा की स्थिति की निगरानी करता है। इन सेंसरों से प्राप्त जानकारी मुख्य कंट्रोल आर्डूइनो ऊनो एवं नोड एमसीयू तक पहुंचती है।
ये प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर तय करते हैं कि कहां कम या ज्यादा पानी है और किस फसल को कितना पानी चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में पानी अधिक हो जाए, तो कंट्रोलर रिले माड्यूल से वाटर पंप को चालू कर देता है।
यह पंप न सिर्फ अतिरिक्त पानी बाहर निकालता है, बल्कि जहां जरूरत है वहां भी पानी भेज देता है। पूरी प्रक्रिया में मिट्टी की नमी, वर्षा व पंप की स्थिति तथा अन्य जानकारी एलसीडी डिस्प्ले, एलईडी मैट्रिक्स डिस्प्ले और ब्लिंक मोबाइल एप पर रियल टाइम में दिखाई देती है। इसकी सहायता से दुनिया के किसी कोने से किसान खेत में भरा पानी निकाल सकेंगे।
प्रोटोटाइप तैयार करने में 15 हजार का खर्च
प्रोजेक्ट के मेंटर बीके सिंह के अनुसार अभी किसानों के पास ऐसी प्रणाली नहीं है, जो परिस्थितियों के अनुसार स्वतः निर्णय ले सके। इसी समस्या के समाधान के लिए स्मार्ट, कम लागत और आइओटी आधारित प्रणाली की परिकल्पना की गई।
हार्डवेयर आर्डूइनो ऊनो, नोड एमसीयू, स्वायल माइश्चर सेंसर्स, रेन सेंसर, रिले माड्यूल, वाटर पंप, एलसीडी डिस्प्ले, मैक्स एलईडी मैट्रिक्स तथा ब्लिंक क्लाउड प्लेटफार्म का चयन किया गया। इसमें विभिन्न फसलों के लिए अलग-अलग नमी की सीमा निर्धारित है।
सिस्टम को इस प्रकार प्रोग्राम किया गया कि यह सेंसरों से मिले डेटा का विश्लेषण करे, जरूरत पर स्वतः पंप चालू करे और मोबाइल एप से किसान को तुरंत सूचना भेजे। छात्र रौनक कुमार ने बताया कि गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी न रहे, तब भी यह सिस्टम ठप नहीं होगा।
डिवाइस में लगा मैट्रिक्स डिस्प्ले बिना इंटरनेट खेत का डेटा दिखाता रहेगा। छात्रा अनन्या के अनुसार पूरे प्रोटोटाइप को तैयार करने में 15 हजार का खर्च आया है।
भविष्य में एआइ, ड्रोन और सैटेलाइट से भी जुड़ेगा सिस्टम
छात्रों का कहना है कि भविष्य में इस सिस्टम को एआइ आधारित मौसम पूर्वानुमान, सोलर एनर्जी, लांग रेंज वाइड एरिया नेटवर्क, ड्रोन और सैटेलाइट डेटा से भी जोड़ा जा सकता है। बीके सिंह ने बताया प्रोजेक्ट के पेटेंट के लिए आवेदन किया गया है।
आइआइटी आइएसएम के इनोवेशन लैब ने इसे सराहा है और काम करने की इच्छा जताई है। प्रोजेक्ट को अटल इनोवेशन मिशन नीति आयोग की ओर से होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता एआइ इम्पैक्ट फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया जाएगा।
