धनबाद में झूमकर बरसा सावन, 24 घंटे में 88 एमएम; सीजन की अब तक की सर्वाधिक बारिश
Dhanbad Weather Update: धनबाद में पिछले 24 घंटों में 88 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे मानसून सीजन का कुल ...और पढ़ें

धनबाद के रणधीर वर्मा चाैक पर झमाझम बारिश के बीच छाता लेकर प्रदर्शन करतीं आंगनबाड़ी सेविकाएं। (फोटोः अमित सिन्हा)
जागरण संवाददाता, धनबाद। धनबाद समेत के ज्यादातर हिस्से में दो दिनों से बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटे में अब तक की सर्वाधिक बारिश का रिकार्ड दर्ज किया गया है। जिले में कुल 88 मिलीमीटर वर्षा हुई है।
सोमवार को बारिश का आंकड़ा 555.8 मिलीमीटर था जो मंगलवार तक 643.8 मिलीमीटर पहुंच गया। एक जून से शुरू हुए मानसून सीजन के 79 दिनों में हुई वर्षा सामान्य बारिश 709.1 मिलीमीटर की तुलना में अब मात्र नौ प्रतिशत कम है। बारिश की गतिविधि जारी रहने से यह कमी भी पूरी होने की अनुमान है।
24 तक जारी रहेगी बारिश की गतिविधि, आज भी बरसेंगे बादल
मौसम विभाग से जारी बुलेटिन में बताया गया कि झारखंड तथा इससे सटे पश्चिम बंगाल के गंगा के तटीय भागाें पर स्थित डिप्रेशन के अगले 24 घंटे के दौरान लो प्रेशर में बदल कर झारखंड एवं बिहार के ऊपर से पश्चिम उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है।
इसके असर से बुधवार को भी राज्य के लगभग सभी स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। उसके बाद निरंतर वर्षा का दौर थम सकता है। हालांकि 24 अगस्त तक बारिश की गतिविधि जारी रहने की संभावना है।
सड़कों पर जलजमाव, मुहल्ले जलमग्न
लगातार बारिश से शहर की सड़कों पर जलजमाव हो गया है। आठ लेन के आसपास के मुहल्ले जलमग्न हो गये हैं। रास्तों पर कई फीट तक जलजमाव के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई है।
यही हाल भुइफोड़ के तपोवन कालोनी व आसपास की है। बारिश का पानी घर और दुकान में घुसने से स्थानीय लोग परेशान हैं। धनबाद स्टेशन के दक्षिणी छोर की सड़क का बुरा हाल है सड़क तालाब में तब्दील हो जाने से पैदल चलना मुश्किल हो गया है।
किसानों के लिए मौसम विभाग की एडवाइजरी
- खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करें, बारिश के बाद अतिरिक्त पानी निकाल दें और यूरिया या ऊपरी खाद डालने से बचें
- अतिरिक्त पानी निकालने के बाद खेत में नियमित गहराई तक पानी बनाए रखें और बीमारी के लक्षणों की निगरानी रखें।
- सब्जियों के फसल की क्यारी के चारों ओर जल निकासी की व्यवस्था करें। जमा हुआ पानी हटा दें। बारिश के दौरान कटाई या छिड़काव न करें। बारिश के बाद बीमारियों पर नजर रखें। रोगग्रस्त पौधों को हटा दें।
