धनबाद [ नीरज दुबे ]। इन दिनों जिले में पुलिसिंग कम, बाबूगीरी ज्यादा हो रही है। शहर के जिस भी थाने जाइए, थानेदार से लेकर मुंशी तक 20 साल पुरानी फाइलों को ढूंढते दिखेंगे। हैरान, परेशान थानेदार सुबह से ही पसीना बहा रहे होते हैैं। इस बीच थानेदार के पास किसी का फोन भी आ जाए, तो रिसीव करना उन्हें अखरता है, क्योंकि पुलिस कप्तान का आदेश ही कुछ ऐसा है। 15 दिनों के अंदर 20 साल पुराने फरार अपराधी व चार्जशीटेट अपराधियों की कुंडली जो तैयार करनी है। सूची ठीक से बनाई जा रही है या नहीं, इसके लिए एक थाना के काम की समीक्षा दूसरे थाना के पुलिस पदाधिकारी करेंगे। ऐसे में थानेदारों का तनाव बढऩा स्वाभाविक है। प्रत्येक थाने में पुरानी फाइलों को खोल कर चेक किया जा रहा है। थाने का हाल देख ऐसा प्रतीत होता है, मानों कुछ कीमती तोहफा खो गया हो।

सिपाही की ठाठ, अफसर लाचार  

डीएसपी ऑफिस के एक सिपाही की ठाठ-बाट के आगे अफसरशाही फीकी है। पेट्रोल-डीजल चाहे जितना महंगा हो जाए, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। वह अपनी स्विफ्ट कार से ही हर दिन बोकारो से धनबाद ड्यूटी पर आता है। कहने को सिपाही है, मगर उसकी पहुंच के आगे बड़े-बड़े अफसर पानी मांगते दिखते हैं। पहले वह डीएसपी (विधि व्यवस्था) मुकेश कुमार का रीडर हुआ करता था। एसएसपी किशोर कौशल के कार्यकाल के दौरान उस पर कुछ गंभीर आरोप लगे। तब उसका तबादला बेगनरिया पिकेट कर दिया गया। इसके कुछ दिन बाद ही उसने फिर करामात दिखाई। एसएसपी अखिलेश बी वारियर ने धनबाद में पदभार संभाला। इसी बीच उसने पुरजोर पैरवी लगवाई और दूसरे डीएसपी के कार्यालय में योगदान दे दिया। सिपाही जब कतरास में तैनात था, तो एक अधिकारी ने काफी मशक्कत करने के बाद उसकी पोस्टिंग धनबाद अपने कार्यालय में करवाई थी। क्या बात है।

कंबल ओढ़कर पी रहे घी

जब से एसएसपी साहब ने धनबाद में योगदान दिया है, कोयला चोरों में हड़कंप है। पुलिस कप्तान के निर्देश पर जीटी रोड के कई पदाधिकारी ईमानदारी की चोला ओढ़ लिए हैैं, मगर कंबल ओढ़कर घी पीने की आदत है कि जाती नहीं। अब यह छूटे कैसे। निरसा इलाके की बात करें तो वहां आधा दर्जन भट्ठों से कोयले का अवैध कारोबार अब भी धड़ल्ले से चल रहा है। थाना स्तर से जब कोयला उठाव में भैरव को मदद मिल रही हैैं तो मंगल स्वाभाविक है कि काम के लिए दम भरेगा। उसे न करना पुलिसकर्मियों के लिए मुश्किल है। इसके बाद मां तारा की शरण में जाकर अधिकारी खुश होते हैैं। अवैध कोयले की खरीदारी के लिए दास भट्ठïा भी स्थानीय पुलिस के लिए दास बना हुआ है। ऐसे में जब तक सीनियर अधिकारी घर से बाहर नहीं निकलेंगे, अवैध कोयला तस्करों की चांदी रहेगी।

हाफ पैंट में मारते हो सैल्यूट...

शहर के पुलिस पदाधिकारियों के बीच का दिलचस्प वाकया है। एक राजपत्रित अधिकारी हर दिन हाफ पैंट में मॉर्निंग वॉक करते हैैं। एक दिन वह वॉक करते हुए शहर के एक थाना भवन में रह रहे पुलिस पदाधिकारी की बैरक पहुंच गए। बैरक में एक पदाधिकारी भी हाफ पैंट में वॉक के लिए रेडी थे। साहब को देखते ही जोरदार सैल्यूट मारा। यह साहब को नागवार गुजरा। उन्होंने पदाधिकारी से कहा- वर्दी कहां है, हाफ पैंट में क्यों हो। साहब के सवाल से पदाधिकारी का गला सूख गया। साहब तो साहब ठहरे, उन्हें इस बात का तनिक आभास नहीं हुआ कि वह भी हाफ पैंट में ही किसी को फटकार लगा रहे हैैं। लॉकडाउन के दौरान सीनियर पदाधिकारी मॉर्निंग वॉक करने वालों को सबक सिखाने से तनिक भी परहेज नहीं करते थे। अब सुबह-शाम अपनी सेहत की देखभाल के लिए दौड़ लगा रहे हैं।धना

Posted By: Mritunjay

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