जागरण संवाददाता, मैथन/निरसा: ईसीएल श्यामपुर बी कोलियरी प्रबंधन की वादा खिलाफी के विरोध में मारकोड़ा गांव के ग्रामीण झामुमो नेता अशोक मंडल के नेतृत्व में कोलियरी का उत्पादन एवं कोयला डिस्पैच का काम बंद करवा कर कोलियरी कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना पर बैठ गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक मारकोड़ा गांव के जमीन के नीचे का वैज्ञानिक जांच शुरू नहीं हो जाती तब तक हम लोग धरना पर बैठे रहेंगे।

मालूम रहे कि मारकोड़ा गांव के ग्रामीण लखीकांत गोराई अपने घर के समीप पानी की समस्या के समाधान के लिए डीप बोरिंग करवा रहे थे। 100 फुट बोरिंग के बाद नीचे खदान निकल गया। जिसके कारण बोरिंग बंद हो गया। इस बात की जानकारी ग्रामीणों को होते ही ग्रामीणों में दहशत फैल गया कि उनके गांव के नीचे की जमीन खोखली है तथा उनका गांव कभी भी जमींदोज हो सकता है। ग्रामीणों ने इसके विरोध में कोलियरी का चक्का जाम पूर्व में भी किया था। कोलियरी प्रबंधन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि 15 दिनों के अंदर वैज्ञानिक तरीके से गांव के जमीन की जांच कराई जाएगी। यदि गांव के नीचे की जमीन खोखली होगी तथा नीचे से कोयला निकाल दिया गया होगा तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।

समय निकल जाने के बावजूद वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू नहीं होने के विरोध में ग्रामीणों ने सोमवार को कोलियरी का चक्का जाम कर धरना पर बैठ गये हैं। धरना को संबोधित करते हुए अशोक मंडल ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि स्थानीय लोग देश हित एवं राज्य हित में अपनी अपनी जमीन उद्योग लगाने एवं कोयला उत्पादन के लिए दे देते हैं। परंतु प्रबंधन उनके जमीन के बदले में मुआवजा एवं नियोजन देने में आनाकानी करने लगता है। प्रबंधन को अपने इस रवैये पर विचार करना चाहिए। ग्रामीणों को विश्वास में लेकर ही कोई भी उद्योग ढंग से संचालित हो सकता है।

लाल झंडा वाले धनबाद संसदीय क्षेत्र के तीन बार सांसद रहे। विधानसभा क्षेत्र में लाल झंडा के बाप बेटे 25 वर्ष तक निरसा का प्रतिनिधित्व किया। मजदूरों एवं किसानों के हक एवं अधिकार दिलाने की बात करने वाले लाल झंडा वालों ने मजदूरों एवं किसानों को बरगला कर सिर्फ अपनी राजनीतिक चमकाने का काम किया। डीवीसी मैथन एवं पंचेत डैम निर्माण के दौरान लगभग 15000 विधानसभा क्षेत्र के लोग विस्थापित हुए। कोलियरी में हजारों लोग लोगों की जमीनें में गई हैं। परंतु आज तक उन लोगों को नियोजन एवं मुआवजा नहीं मिला। लाल झंडा की राजनीति करने वालों ने उनके लिए कुछ नहीं किया।

उन्होंने कहा कि बीसीसीएल के दहीबाड़ी कोलियरी में 23 लोगों की जमीन से प्रबंधन ने कब का कोयला निकाल लिया। परंतु जिनकी जमीन अधिग्रहण की गई उन लोगों को आज तक परमानेंट नौकरी तक प्रबंधन ने नहीं दिया। जब इसका रैयत विरोध करते हैं तो उन पर झूठा मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी जाती है। इतने वर्षों तक लाल झंडा के प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों ने क्या किया।

क्या हुआ 1982 का समझौता पत्र का

अशोक मंडल ने कहा कि 1980-82 में तत्कालीन कोयला मंत्रालय के पदाधिकारियों के साथ तत्कालीन विधायक केएस चटर्जी की वार्ता हुई थी। जिसमें सहमति बनी थी कि मारकोड़ा गांव को स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही 282 लोगों को नौकरी देने की बात भी बनी थी। तत्कालीन ईसीएल प्रबंधन द्वारा स्थान का सर्वे भी कराया गया था। जिसमें सर्वे विभाग ने रिपोर्ट दिया था कि उक्त गांव के नीचे उत्तम क्वालिटी का भारी मात्रा में कोयला है। उक्त समझौता पत्र पर प्रबंधन ने क्या कार्रवाई किया। प्रबंधन को सारी बातें जनता के बीच स्पष्ट रूप से रखी चाहिए।

वहीं दूसरी ओर कोलियरी प्रबंधन पीके मिश्रा ने कहा कि मारकोड़ा गांव के जमीन के नीचे के हिस्से की जांच के लिए देश के 6 वैज्ञानिक संस्थाओं को पत्र लिखा गया है। जिसमें आईआईटी बीएचयू एवं आईआईटी खड़कपुर की टीम ने अपना कोटेशन भेजा है। सिंफर के द्वारा भी बहुत जल्द कोटेशन भेजा जा रहा है। सारे स्थानों से कोटेशन आ जाने के बाद प्रबंधन द्वारा उन्हें काम करने की अनुमति दी जाएगी। प्रबंधन जमीन की वैज्ञानिक जांच के लिए प्रयासरत है। ग्रामीणों को इस बात को समझना होगा।

मौके पर जिप सदस्य रेखा महतो, मुखिया अशोक महतो, ठाकुर मांझी, शिवलाल सोरेन, देवेंद्र टूडू, राजू झा, संजय गोराई, संतोष गोराई, आशीष मुखर्जी,विजय गोराई, जयदेव गोराई, दिनेश गोराई, मितन बनर्जी, उत्तम राय, नंदो धीवर, काली गोप ग्रामीण इत्यादि मौजूद थे।

Edited By: Atul Singh