धनबाद में अग्नि प्रभावित क्षेत्रों के मानवाधिकारों पर कोर्ट का बड़ा आदेश, BCCL-DGMS समेत 20 से अधिक को नोटिस
धनबाद के अग्नि प्रभावित और भू-धसान क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सिविल कोर्ट में एक मुकदमा दायर किया गया है।

कतरास में भू-धंसान को देखते लोग। (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, धनबाद। झरिया कोयलांचल में अग्नि प्रभावित एवं भू-धंसाव क्षेत्र के लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए धनबाद सिविल कोर्ट के अधिवक्ता दीप नारायण ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत अदालत में मुकदमा दायर किया है।
अदालत ने उभय पक्ष को सुनने के बाद बीसीसीएल, जिला प्रशासन, डीजीएमएस, पुलिस, सीआईएसएफ, नगर निगम एवं पर्यावरण विभाग समेत संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
धनबाद में जमीन धंसने और भूमिगत आग के खतरे पर कोर्ट में मुकदमा
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 30 तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दायर आवेदन में कहा गया है कि झरिया, कतरास, सिजुआ, कुस्तौर, बस्ताकोला, लोदना, पुटकी-बलिहारी, गोविंदपुर, बरोरा, मुनीडीह समेत कोयला खनन एवं भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन, मकान, प्रतिष्ठान, आजीविका एवं संपत्ति पर लगातार खतरा बना हुआ है।
अचानक जमीन धंसने, दरार पड़ने, भूमिगत आग और सतह धंसने की घटनाओं से लोग भय के माहौल में रह रहे हैं।
भू-धंसान प्रभावितों के अधिकार की लड़ाई कोर्ट पहुंची
अधिवक्ता ने अदालत से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है कि क्या प्रभावित क्षेत्रों में अवैध कोयला उत्खनन जारी है और अनधिकृत प्रवेश व खनन रोकने में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई चूक, लापरवाही या मिलीभगत हुई है।
संबंधित रिकॉर्ड मंगाकर साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग की गई है। साथ ही केंद्र व राज्य सरकार, बीसीसीएल, डीजीएमएस, जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस/सीआईएसएफ और पर्यावरण प्राधिकरणों से विस्तृत रिपोर्ट मांगे जाने का आग्रह किया गया है।
भू-धंसान प्रभावित इलाकों का वैज्ञानिक सर्वे और हैजर्ड मैप की मांग
आवेदन में खनन इंजीनियरिंग, भूविज्ञान, भू-तकनीकी इंजीनियरिंग, खान सुरक्षा, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विशेषज्ञों की स्वतंत्र बहु-विषयक समिति गठित करने की मांग की गई है।
समिति से धनबाद के भूमि-धंसाव प्रवण, अग्नि प्रभावित और अन्य खतरनाक क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं मानचित्रण कराने तथा जीआईएस आधारित सार्वजनिक हैजर्ड मैप तैयार कर सुरक्षित, संवेदनशील और खतरनाक क्षेत्रों को वर्गीकृत करने का आग्रह किया गया है।
जहां जमीन में दरार, भूमिगत आग, गैस उत्सर्जन, भूमि धंसाव या अन्य खतरे के संकेत मिले हैं, वहां तत्काल निरीक्षण कराने और जरूरत पड़ने पर दुर्घटना की प्रतीक्षा किए बिना लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की मांग की गई है।
खनन समाप्त क्षेत्रों का स्वतंत्र ऑडिट कर वैज्ञानिक तरीके से बैकफिलिंग, स्थिरीकरण एवं पुनर्स्थापन की स्थिति की जांच करने तथा अनुपालन नहीं होने पर जिम्मेदारी तय करने का भी आग्रह किया गया है।
अधिवक्ता ने खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, बाड़बंदी/बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था और चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था करने की मांग की है।
बीसीसीएल, डीजीएमएस और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से खतरनाक आबादी वाले क्षेत्रों की पहचान, लोगों को चेतावनी, आसन्न खतरे वाले स्थानों से निकासी तथा विस्थापित परिवारों के लिए अस्थायी आवास, भोजन, चिकित्सा सहायता और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
