जासं, झरिया-अलकडीहा: लोदना एनटीएसटी परियोजना प्रबंधन की लापरवाही से नौ नंबर साइडिंग में स्टाक किए गए कोयले में एकबार फिर आग लग गई है़। आग धीरे-धीरे विकराल रूप लेती जा रही है। लेकिन आग को बुझाने के प्रति प्रबंधन गंभीर नहीं है। इससे बीसीसीएल को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इससे पहले डेढ़ वर्ष पूर्व भी साइडिंग और साउथ तिसरा के कोल डंप में स्टाक किए गए कोयले में आग लगी थी।

जले कोयले का रेल डिस्पैच करने से पावर हाउस ने बीसीसीएल से हर्जाना भी वसूला था। इसके चलते भी कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। लोदना के अधिकारियों ने पावर हाउस की ओर से पैसे काटे जाने के बाद सबक लेने के बजाय इस बार भी जानबूझकर आग को नियंत्रण करने के मामले को नजरअंदाज कर रहा है़। जबकि जले कोयले के डिस्पैच होने से बीसीसीएल को नुकसान के साथ कोयला मंडी व पावर हाउस में कंपनी की छवि भी खराब होती है़।

बताते हैं कि देश में ऊर्जा स्रोत के लिए पावर हाउस को गुणवता युक्त कोयले की अतिआवश्यकता है़। इनदिनों पावर हाउस कोयला कमी के गंभीर संकट से गुजर रहा है़। मानसून में अगर कोयला उद्योग से पर्याप्त कोयले की आपूर्ति पावर हाउस को नहीं की गई तो देश में बिजली की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है़। पिछले दिनों ऊर्जा मंत्रालय की टीम ने इस संदर्भ में बीसीसीएल में भी आकर मानसून समय काल के लिए कोयला के स्टाक और गुणवता को देखा।

टीम ने कोल अधिकारियों को गुणवता युक्त कोयले डिस्पैच को प्राथमिकता के तौर पर करने के निर्देश भी दिए। टीम के लोदना क्षेत्र का दौरा कर जाते ही साइडिंग में स्टाक किए गए कोयले में लगी आग को बुझाने में प्रबंधन की ओर से लापरवाही बरतने के कारण आग अब धीरे-धीरे विकराल रूप लेते जा रही है़। जबकि सभी कोल डिपुओं व साइडिंग में आग पर काबू पाने के लिए पानी, पाइपलाइन व उपकरण की भी व्यवस्था है़।

इसके बाद भी कोल अधिकारियों के इस मामले में शिथिलता बरतने का क्या राज है़। यह जांच का विषय है़। परियोजना के कोई भी अधिकारी इस मामले में किसी तरह की टिप्पणी करने से बच रहे है़। डेढ़ वर्ष पूर्व भी साउथ तिसरा कोल डंप में लगी आग को बुझाने में लापरवाही बरतने से लगभग एक लाख टन कोयला जल कर खाक हो गया था। उक्त जले कोयले को अन्य कोयले में मिश्रित कर रेल से डिस्पैच कर दिया गया था। इसके एवज में खराब गुणवता के चलते पावर हाउस ने बीसीसीएल से बड़ी रकम काट लिया था। इससे बीसीसीएल को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था।

Edited By: Atul Singh