धनबाद, जेएनएन। झारखंड में सीआइडी के पुलिस अधीक्षक मनोज रतन चोथे के दामन पर गंभीर दाग लगे हैं। यह दाग उस समय के हैं जब वह धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक पद पर तैनात थे। धनबाद से स्थानांतरण के बाद उनके दामन पर लगे दाग दिखने लगे हैं। इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और पुलिस महानिदेशक डीके पांडेय तक पहुंची है। 

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी मनोज रतन चोथे 15/07/2016 से 23/11/2018 तक धनबाद के एसएसपी रहे। उनके स्थानांतरण के बाद धनबाद के व्यवसायी दीपक सांवरिया ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत की है। सांवरिया का आरोप है- पहले उनके खिलाफ दो मामले दर्ज किए गए और फिर सलटाने के नाम पर चोथे ने 11 लाख रुपये रिश्वत लिये। प्रधानमंत्री कार्यालय तक आइपीएस चोथे के खिलाफ शिकायत पहुंचने के बाद झारखंड के डीजीपी डीके पांडेय ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए शिकायत पत्र अग्रसारित किया है।

प्रधानमंत्री को भेजे गए शिकायत पत्र में लगे आरोपः सांवरिया ने शिकायती पत्र में यह दावा किया  है कि उसके खिलाफ गलत आरोप लगाते हुए धनसार और बैंक मोड़ थाने में दो प्राथमिकी दर्ज कराई गई। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सांवरिया ने अपने को निर्दोष बताते हुए तत्कालीन एसएसपी चोथे से मुलाकात की। सांवरिया ने दावा किया है कि इस घटना के बाद चोथे से मिलकर मामले की जानकारी दी। इसके बाद चोथे ने पैसे की मांग की। साथ ही यह भी कहा कि इस मामले में कोई भी बात होगी तो उसे सूचित कर देंगे। बाद में उसने एसएसपी के आवास पर मुलाकात की और 11 लाख रुपये दिए। 

तत्कालीन एसएसपी ने खारिज किया आरोपः धनबाद के तत्कालीन एसएसपी मनोज रतन चोथे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने मीडिया को दिए बयान में कहा है- व्यवसायी सांवरिया के खिलाफ धनसार और बैंक मोड़ थाने में दर्ज मामले का सुपरविजन  सिटी एसपी पीयूष पांडे ने किया था। केस सत्य पाए जाने पर न्यायालय के आदेश से दीपक सांवरिया को जेल भेजा गया था। पैसे लेने का आरोप बेबुनियाद और मनगढंत हैं। 

Posted By: mritunjay