चेक बाउंस मामलों के लिए वीकेंड कोर्ट का प्रस्ताव, धनबाद बार एसोसिएशन ने जताई असहमति
धनबाद बार एसोसिएशन ने चेक बाउंस मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए सप्ताहांत अदालतों के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।

शनिवार और रविवार को विशेष सप्ताहांत अदालतें आयोजित करने के प्रस्ताव। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
धनबाद बार एसोसिएशन ने सप्ताहांत अदालतों के प्रस्ताव को नकारा।
अधिवक्ताओं के लिए शनिवार-रविवार अवकाश के दिन होते हैं।
झारखंड हाई कोर्ट ने सभी जिलों से राय मांगी थी।
जागरण संवाददाता, धनबाद। झारखंड की अदालतों में चेक बाउंस से जुड़े धारा 138 एनआई एक्ट के लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए शनिवार और रविवार को विशेष सप्ताहांत अदालतें आयोजित करने के प्रस्ताव पर धनबाद बार एसोसिएशन ने असहमति जता दी है।
बार एसोसिएशन का कहना है कि सप्ताहांत अधिवक्ताओं के लिए अवकाश का समय है और इन दिनों अदालत में उपस्थिति व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। ऐसे में इस प्रस्ताव को लेकर बार और न्यायिक प्रशासन के बीच गतिरोध की स्थिति बनने की संभावना है।
झारखंड हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ने मांगी है राय
झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने 17 अगस्त 2026 को पत्र जारी कर राज्य के सभी न्यायिक जिलों से शनिवार और रविवार को विशेष सप्ताहांत अदालतें आयोजित कर धारा 138 एनआई एक्ट के मामलों के शीघ्र निष्पादन की व्यवहार्यता पर राय मांगी है।
पत्र में आवश्यक सहयोग के संबंध में भी सुझाव मांगे गए हैं। इसी क्रम में धनबाद सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार इशराक जिया खान ने धनबाद बार एसोसिएशन के सचिव से इस प्रस्ताव पर विचार एवं टिप्पणी मांगी है, ताकि इसे हाईकोर्ट के समक्ष रखा जा सके।
शनिवार-रविवार अवकाश के दिन
धनबाद बार एसोसिएशन की ओर से महासचिव जितेंद्र कुमार ने कहा कि शनिवार और रविवार अधिवक्ताओं के लिए निर्धारित अवकाश के दिन हैं। ऐसे में इन दिनों नियमित अदालत के अतिरिक्त विशेष अदालतों में अधिवक्ताओं की उपस्थिति सुनिश्चित करना संभव नहीं होगा।
महासचिव ने इस व्यवस्था को लागू करने से पहले अधिवक्ताओं की व्यावहारिक कठिनाइयों और उनके अवकाश के अधिकार को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि धारा 138 एनआई एक्ट के मामलों के शीघ्र निष्पादन के उद्देश्य से बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, लेकिन इसके लिए सप्ताहांत के अवकाश में अधिवक्ताओं को अदालत में उपस्थित होने के लिए बाध्य करना उचित एवं व्यावहारिक समाधान नहीं है।
केंद्रीय विधि मंत्रालय ने दिया है विशेष सप्ताहांत ट्रायल कोर्ट का निर्देश
हाईकोर्ट के पत्र में केंद्र सरकार के विधि मंत्रालय के न्याय विभाग के 5 अगस्त 2026 के पत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें शनिवार एवं रविवार को विशेष सप्ताहांत ट्रायल कोर्ट आयोजित करने की व्यवहार्यता पर राज्यों से विचार मांगे गए हैं।
