धनबाद, जेएनएन। झारखंड उच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं की मांग को देखते हुए राज्य में फिजिकल कोर्ट शुरू करने के लिए (SOP ) गाइडलाइन जारी कर दिया है। झारखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार अंबुज नाथ द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक वैसे जिले जहां कोविड-19 के 50 एक्टीव केस हैं, वहां कुल न्यायाधीशों की संख्या के आधे न्यायाधीश फिजिकल कोर्ट करेंगे। बाकी न्यायाधीश वर्चुअल कोर्ट करेंगे। वही जिस जिले में 50 से 150 कोविड-19 के एक्टीव मरीज है वहां एक तिहाई की संख्या में न्यायाधीश फिजिकल कोर्ट करेंगे। जिस जिले में 150 या उससे अधिक एक्टीव केस होंगे वहां एक चौथाई की संख्या में न्यायाधीश फिजिकल कोर्ट करेंगे। बाकी न्यायाधीश वर्चुअल कोर्ट करेंगे। हाई कोर्ट के दिशा-निर्देश के बाद जल्द ही धनबाद कोर्ट में फिजिकल सुनवाई की उम्मीद बढ़ गई है।

धनबाद बार एसोसिएशन ने किया स्वागत

झारखंड बार काउंसिल के स्टियरिंग कमिटी के कनवेनर सह धनबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने कहा कि न्यायाधीशों के फिजिकल कोर्ट करने के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा रोस्टर बनाया जाएगा और रोस्टर के तहत हीं न्यायाधीशगण फिजिकल कोर्ट करेंगे। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय ने चरणबद्ध तरीके से कोर्ट खोलने की अनुमति दी है। सभी कोर्ट रूम में सैनिटाइजेशन व कोविड-19 गाइडलाइन का पूरा पालन किया जाएगा। कोर्ट रूम के अंदर दो से तीन अधिवक्ताओं को ही एक बार में जाने की इजाजत होगी। जिन अधिवक्ता का केस में सुनवाई शुरू होगा वह अधिवक्ता अदालत में जाएंगे और बहस करेंगे। धनबाद में जिला प्रशासन के आंकड़े के मुताबिक आज तक 71 कोविड-19 मरीज हैं। इस लिहाज से उच्च न्यायालय द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक धनबाद में फेज दो के तहत एक तिहाई न्यायिक पदाधिकारी फिजिकल कोर्ट करेंगे। उच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रोस्टर बनाएंगे। प्रत्येक दिन हर कैडर के दो-दो कोर्ट फिजिकल सुनवाई करेंगे। 

गोस्वामी ने बताया कि गाइडलाइन के मुताबिक रोस्टर के तहत एक दिन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, अनुमंडल  न्यायिक दंडाधिकारी, अवर न्यायाधीश के दो कोर्ट, न्यायिक दंडाधिकारी के दो कोर्ट काम करेंगे। उच्च न्यायालय के इस आदेश से अधिवक्ताओं में काफी खुशी है। गोस्वामी ने बताया कि 8 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश के साथ हुई बार काउंसिल के वार्ता के बाद यह परिणाम आया है जो अधिवक्ताओं के लिए काफी सुखद है।

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