धनबाद [बलवंत कुमार]। अर्थिक मंदी के कारण धनबाद का ऑटोमोबाइल सेक्टर स्लो डाउन हो गया है। यानी यह कारोबार भी मंदा चल रहा है। ऐसे में विभिन्न कंपनियों के शो रूम में काम करने वाले कामगारों की नौकरी पर जहां आफत आ गई है, वहीं वाहनों की बिक्री ना होने के कारण मालिकों की भी हालत खस्ता है। अब बस उम्मीद दुर्गा पूजा, धनतेरस, दिपावली और छठ को लेकर है। अनुमान लगाया जा रहा है कि त्यौहारों के सीजन के दौरान मंदी का कोहरा हटेगा।

इस वर्ष के जून माह से ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी आने के कयास लगाए जा रहे थे। जबकि इसके विपरीत बाजार में गिरावट दर्ज की जाने लगी। औसत 20 फीसद की गिरावट प्रत्येक माह रही। नतीजतन अगस्त के अंतिम सप्ताह तक यह गिरावट विभिन्न कंपनियों के लिए 3.5 से लेकर 60 फीसद तक रही। चार पहिया वाहन बेचने वाले प्रतिष्ठानों की यह हालत हो गई कि उन्हें अपने यहां से कर्मचारियों की छंटनी के लिए मजबूर होना पड़ा। आर्थिक मंदी का असर मारुति जैसे ब्रांड की आल्टो और वैगन आर जैसी कारों पर भी पड़ा है।

रेनॉल्ट ब्रांड से जुड़े अनिमेष ने बताया कि लग्जरी कारों की बिक्री पर यह असर कम देखने को मिला है, लेकिन छोटी कारों का बाजार लगभग ठप पड़ा हुआ है। प्रत्येक दिन जहां एक गाड़ी बिक जाया करती थी, अब स्थिति यह है कि 12 गाडिय़ां भी नहीं बिक पा रही हैं।

टोयटा कारों के व्यापार से जुड़े यश आदित्य ने बताया कि 19-20 फीसद की गिरावट कंपनी के कारों पर आयी है। इसे संभालने के लिए कंपनी के स्तर से कई ऑफर दिए जा रहे हैं, लेकिन ग्राहकों का रूझान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि त्यौहारों का सीजन आ रहा है। ऐसे मौके पर धनबाद में वाहनों की अच्छी बिक्री होती है। आर्थिक मंदी से उबरने के लिए बस अब त्यौहारों का भरोसा है।

मानसून की भी पड़ी मार : ऑटोमोबाइल बिजनेस का एक फंडा यह भी होता है कि मानसून के सीजन में वैसे भी वाहनों की बिक्री में कमी आती है। मानसून के बाद इसमें सुधार की गुंजाइश होती है, लेकिन इस बार वह भी कम ही दिख रही है।

विभिन्न कंपनियों के वाहनों की बिक्री की स्थिति

मारुति - 17 फीसद गिरावट

टाटा मोटर्स  - 20 फीसद गिरावट

ह्यूंडैई - 3.2 फीसद गिरावट

टोयोटा - 19 फीसद गिरावट

महिंद्रा एंड महिंद्रा - 10 फीसद गिरावट

Posted By: Mritunjay

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