जाटी, झरिया : कोयलांचल में अवैध खनन व अन्य तरीकों से चोरी किया अवैध कोयला सड़क मार्ग से यूपी व अन्य इलाकों में तो जाता ही है। नदी के रास्ते भी इस कोयले की तस्करी होती है। बंगाल के पुरुलिया के चेलियामा में यह कोयला यहां से पहुंचाया जाता है। वहां से उसे अवैध कोयला भट्ठों में खपा दिया जाता है। झरिया से यह कोयला बलियापुर के कालीपुर, सरिसाकुंडी, सिदरी के डोमगढ़ व भौंरा के मोहलबनी घाट से नाव से भेजा जाता है। बलियापुर में सात, सिदरी में तीन व भौंरा में एक नाव इस काम में लगी है। तस्करों का एक सिडीकेट इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहा है। इसमें झरिया के अलावा बलियापुर, भौंरा, सिदरी व बंगाल तक के तस्कर शामिल हैं। एक नाव में लगभग 20 क्विंटल कोयला एक बार में लोडकर भेजा जाता है। अमूमन एक नाव पांच फेरे लगाती हैं। हालांकि जब कोयला कम ज्यादा होता है तो फेरों की संख्या घट बढ़ जाती है। तस्कर अवैध खनन करनेवालों व चुननेवालों से लिया गया कोयला साइकिल व बाइक से बोरियों में कोयला घाट तक मंगवाते हैं। उसके बाद उसे बाहर भेज दिया जाता है। ..

कोयले अधिक हुआ तो ट्यूब का लेते सहारा : मोहलबनी घाट पर कोयला लेकर एक नाव ही जाती है। कई बार कोयला ज्यादा होता है तब कोयला तस्कर इसे नदी पार कराने के लिए बड़े वाहन के ट्यूब का सहारा लेते हैं। हवा भरे कई ट्यूब एक साथ बांध दिए जाते हैं। उस पर लकड़ी का पटरा बांध दिया जाता है। इसी पटरे के सहारे आठ बोरी यानी चार सौ किलो तक कोयला नदी से पार करा दिया जाता है। गर्मी के समय नदी में पानी कम है तो पैदल ही मजदूरों से कोयला नदी पार भेजा जाता है। वर्षों से यह सिलसिला चल रहा है। कभी कभार छापामारी होती है। लेकिन कोयले का अवैध धंधा नहीं रुक रहा है। नदी मार्ग से कोयले की तस्करी के अवैध धंधे से तस्कर मालामाल हो रहे हैं। मजदूरों से दो रुपये किलो की दर से कोयला खरीदा जाता है। एक बोरी में लगभग 50 किलो कोयले को एक सौ में खरीद लेते हैं। बाद में इसे तस्कर सात हजार रुपये प्रतिटन या उससे अधिक की दर पर बेच देते हैं।

Posted By: Jagran

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