धनबाद : कोयला तस्करी के खिलाफ शुक्रवार को पुलिस विभाग को मुख्यमंत्री रघुवर दास के कड़े आदेश के बावजूद धनबाद में बड़े पैमाने पर यह गोरखधंधा कोयलांचल में बेखौफ जारी है। हालांकि सीएम के तीखे तेवर के कारण कुछ स्थानों पर पुलिस एक्शन में दिखी मगर यह असरदार कम दिखावा अधिक रहा। इसे थानेदारी बचाने की कसरत के रूप में देखा जा रहा है। सीएम ने बेईमान थानेदारों को तत्काल लाइन क्लोज कर ईमानदार अधिकारियों की तैनाती का निर्देश दिया है।

धनबाद में कोयले की कालिख अक्सर पुलिस अधिकारियों के दामन पर लगते रहे हैं। हमेशा की तरह इन दिनों भी सत्ता तक पहुंच रखने वाले नेताओं व दबंगों के संरक्षण में कोयले का काला धंधा फल-फूल रहा है। इस कारोबार को करोड़ों रुपये से सींचा जा रहा है। काली कमाई की मलाई नीचे से ऊपर तक बंटती है। पूरे जिले में कोई भी स्थान बाकी नहीं है, जहां कोयले का खेल नहीं चल रहा है। अवैध खनन हो या फिर सेटिंग-गेटिंग से बीसीसीएल के कोयला डंपों और आउटसोर्सिग स्थलों से कोयला टपा कर ठिकाने लगाना, खाकी-खादी-सफेदपोश का गठबंधन हर जगह हावी है। मोहरे बने हैं छोटे-छोटे लोग।

सीएम के धनबाद दौरे से एक सप्ताह पूर्व धंधे पर लगाम के लिए वरीय पुलिस अधिकारी की तरफ से सभी थानेदारों को आदेश जारी गया था। गठजोड़ में शामिल कुछ लोगों ने इसे बस 'कुछ दिनों का मामला' मान हाथ-पांव समेट लिये मगर काली कमाई के अभ्यस्त हो चुके कई आर्थिक अपराधियों ने इसकी कोई परवाह नहीं की। बरवाअड्डा, गोबिंदपुर, निरसा हो या झरिया हर जगह कोयला के अवैध कारोबार की गूंज सत्ता की डंके के साथ सुनाई दे रही है। सत्ताधारी दल के दो विधायकों व स्थानीय निकाय से जुड़े एक जनप्रतिनिधि इस धंधे में खुलेआम शामिल होना आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इनकी करतूतों की खबर सीएम तक भी पहुंच चुकी है।

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एसएसपी कार्यालय के सामने से रोजाना गुजरती हैं सैकड़ों साइकिलें :

तेतुलमारी, इस्ट बसुरिया आदि क्षेत्र की कोलियरियों से कोयला चुराकर भट्ठे तक पहुंचाने के धंधे की खबर छोटे से लेकर बड़े पुलिस अधिकारी को है। यहां तक कि प्रतिदिन सुबह से लेकर देर शाम तक सड़कों पर बेखौफ कोयला ढोने वाले चलते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं एसएसपी कार्यालय से ही होकर प्रतिदिन गुजरते हैं। कचहरी रोड में ही सुस्ताते हैं। हां, इस छूट के लिए उन्हें कीमत चुकानी पड़ती है। भूली, बैंकमोड़, धनबाद और बरवाअड्डा थाने के सिपाहियों को इस छूट के एवज में बंधी-बंधाई रकम मिल जाती है। इस रकम का एक हिस्सा संबंधित थानेदारों की भी जेब में जाता है।

Posted By: Jagran

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