सीएमपीएफ जुर्माना और अपील के नए नियम: कोयला मंत्रालय ने जारी किया मसौदा, 26 जुलाई तक दें सुझाव
Coal Ministry ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड (सीएमपीएफ) जुर्माना और अपील नियमों का मसौदा जारी किया है। सभी संबंधित पक्षों ...और पढ़ें

कोयला मंत्रालय ने जारी किया सीएमपीएफ का नया मसौदा। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
कोयला मंत्रालय ने सीएमपीएफ नियमों का मसौदा जारी किया।
जुर्माना निर्धारण और अपील की विस्तृत प्रक्रिया तय।
सभी पक्षों से 26 जुलाई तक सुझाव आमंत्रित।
जागरण संवाददाता, धनबाद। CMPF कोयला मंत्रालय ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजंस (जुर्माना निर्धारण और अपील) नियम, 2026 का मसौदा जारी कर दिया है। इन प्रस्तावित नियमों के तहत कोयला खदानों से जुड़े भविष्य निधि मामलों में जुर्माना तय करने और उसके खिलाफ अपील करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। मंत्रालय ने सभी संबंधित पक्षों से 26 जुलाई शाम तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
जन विश्वास संशोधन अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने की तैयारी
कोयला मंत्रालय के सीएमपीएफ अनुभाग की ओर से 13 जुलाई को जारी कार्यालय आदेश के तहत यह मसौदा नियम जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत कोल माइंस प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजंस अधिनियम, 1948 में किए गए बदलावों को लागू करने के लिए तैयार किया गया है। मसौदा नियमों की प्रति कोल माइंस प्रोविडेंट फंड संगठन (सीएमपीएफओ) ने मंत्रालय को भेजी थी।
राज्यों, कोल इंडिया और एससीसीएल से मांगे गए सुझाव
मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, कोल इंडिया लिमिटेड, उसकी सभी सहायक कंपनियों, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) और अन्य संबंधित संस्थानों से तय समय सीमा के भीतर सुझाव भेजने का आग्रह किया है। ई-मेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 26 जुलाई के बाद प्राप्त सुझावों को पूर्व-विधायी परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जाएगा।
पहली बार तय होगी जुर्माना निर्धारण और अपील की विस्तृत प्रक्रिया
मसौदा नियमों में पहली बार सीएमपीएफ अधिनियम के तहत जुर्माना लगाने और अपील की पूरी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसके लिए निर्णायक अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है, जो उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई कर जुर्माना तय करेंगे। जांच में सहायता के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किए जा सकेंगे।
नोटिस, जवाब और सुनवाई की प्रक्रिया होगी स्पष्ट
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, संबंधित पक्ष को नोटिस जारी करने, जवाब दाखिल करने और व्यक्तिगत सुनवाई का स्पष्ट प्रावधान होगा। सुनवाई भौतिक माध्यम या ऑनलाइन माध्यम से भी की जा सकेगी। इसके अलावा दस्तावेजों, अभिलेखों और गवाहों को बुलाने का अधिकार भी अधिकारियों को दिया जाएगा।
उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर तय होगा जुर्माना
जुर्माना तय करते समय उल्लंघन की गंभीरता, उसकी अवधि, प्रभावित कर्मचारियों की संख्या और जनहित जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। निर्णायक अधिकारी के आदेश के खिलाफ संबंधित पक्ष 30 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकेगा।
डिजिटल माध्यम से होगी पूरी प्रक्रिया
मसौदा नियमों में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है। नोटिस, आदेश और अन्य सूचनाएं ई-मेल, डिजिटल पोर्टल या अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों से भेजी जा सकेंगी। इसके साथ ही अपील भी ऑनलाइन या भौतिक माध्यम से दाखिल करने की सुविधा दी जाएगी।
सुझावों के बाद अंतिम रूप दिए जाएंगे नियम
कोयला मंत्रालय ने कहा है कि मसौदा नियमों को सार्वजनिक करने का उद्देश्य सभी संबंधित पक्षों की राय प्राप्त करना है। मिले सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।
