धनबाद, जेएनएन। देश में कोयला का काफी बड़ा भंडार है। देश में कोकिंग कोल की जरूरत को पूरा करने व आयात को कम करने के लिए कोल इंडिया ने प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। विश्व कोयला संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिशेल मनूक के अनुसार, 2040 तक भारत में कोयला ही बिजली का सबसे बड़ा एकल स्रोत बना रहेगा। बुनियादी ढांचे के विकास और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए कोयले का उपयोग अक्षय ऊर्जा स्रोतों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। मनूक ने कोयला उद्योग सलाहकार बोर्ड (सीआइएबी) की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। मिशेल ने कहा की पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भारत में कुशल, स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों के व्यापक विकास और तैनाती को बढावा दे रहा हैं ।

कोयले के आयात में आई कमी

सीआइएबी कोयला उद्योग के नेताओं का प्रतिनिधित्व करता है, जो कोयले के लिए एक स्थायी भविष्य का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है और हमारी विश्वव्यापी आर्थिक और पर्यावरणीय आकांक्षाओं को प्राप्त करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। भारत में कोयला बिजली से उत्सर्जन को कम करने की दिशा में व्यापक विस्तार कर रहा है। सरकार का दावा है कि कोयला आयात में काफी कमी आई है।

झारखंड की कोल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने का निर्देश

झारखंड में कोयला उत्पादन करने वाली तीन बड़ी कंपनियां हैं। इसमें एक कंपनी कोकिंग कोल उत्पादन करती है। ईसीएल को संथाल परगना में कोल ब्लॉक आवंटन किए गए हैं।  वहां पर खनन करने के लिए जल्द से जल्द प्लान तैयार करने का आदेश दिया गया है। हालांकि बीसीसीएल को संथाल परगना में मिले 4 कोल ब्लॉकों में 2 कोल ब्लॉक कोयला मंत्रालय को वापस कर दिया है। इसके एवज में उसे 500 करोड़ रूपये वापस कर दी गई है।

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