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कोल इंडिया कर्मचारियों के PLR पर अक्टूबर में फैसला संभव, 1.10 लाख तक पहुंचने की उम्मीद

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:15 PM (GMT+05:30)

Coal India के गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के पीएलआर/बोनस निर्धारण पर 3-4 अक्टूबर को अहम बैठक होगी। इस बार 2.10 लाख कर्मचारियों ...और पढ़ें

कोल इंडिया में बोनस पर मंथन तेज। (प्रतीकात्मक फोटो)

कोल इंडिया में बोनस पर मंथन तेज। (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. कोल इंडिया पीएलआर निर्धारण पर 3-4 अक्टूबर को बैठक।

  2. 2.10 लाख गैर-कार्यकारी कर्मचारियों को मिलेगा बोनस का लाभ।

  3. पीएलआर 1.03 लाख से बढ़कर 1.10 लाख होने की संभावना।

जागरण संवाददाता, धनबाद। कोल इंडिया के गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के वित्तीय वर्ष 2025-26 के पीएलआर (परफार्मेंस लिंक्ड रिवार्ड)/एक्स-ग्रेशिया के निर्धारण को लेकर तीन और चार अक्टूबर को अहम बैठक हो सकती है। बोनस को लेकर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी मंथन शुरू कर दिया है।

पिछले वर्ष कर्मचारियों को 1.03 लाख रुपये पीएलआर मिला था। इस बार इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है और राशि करीब 1.10 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

पीएलआर का लाभ कोल इंडिया के करीब 2.10 लाख गैर-कार्यकारी कर्मचारियों को मिलेगा। ऐसे में बोनस के निर्धारण को लेकर कर्मचारियों के साथ-साथ ट्रेड यूनियनों की नजर अक्टूबर में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी है।

बैठक में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रबंधन इंटक से संबद्ध राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन को चर्चा में शामिल करता है या नहीं। संभावना है कि एपेक्स जेसीसी के सदस्यों के साथ पीएलआर के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जाए।

दरअसल, तीन अगस्त को हुई एपेक्स जेसीसी की बैठक में दो यूनियन प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया था कि पीएलआर निर्धारण के लिए जेबीसीसीआई की स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी के बजाय एपेक्स जेसीसी में चर्चा कराई जाए। इसके बाद इस मुद्दे पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

अब औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के संक्रमण और नई वार्ता व्यवस्था के बीच पीएलआर तय करने के लिए उपयुक्त मंच को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।

बोनस निर्धारण के लिए सामने आए तीन विकल्प

स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी: पीएलआर निर्धारण के लिए पहला और पारंपरिक विकल्प जेबीसीसीआई की स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी है। अब तक पीएलआर पर इसी कमेटी में प्रबंधन और यूनियनों के बीच द्विपक्षीय बातचीत होती रही है।

हालांकि, 11वें जेबीसीसीआई की अवधि समाप्त होने के बाद इस कमेटी के मौजूदा अधिकार और निर्णय लेने की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीएलआर का एनसीडब्ल्यूए-11 का हिस्सा नहीं होना भी इस मामले को और जटिल बनाता है।

सीआइएल एपेक्स जेसीसी: दूसरा विकल्प कोल इंडिया एपेक्स जेसीसी का है। इस व्यवस्था में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों से पीएलआर पर राय ली जा सकती है और इसके बाद सक्षम स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है।

हालांकि, इसे औद्योगिक संबंध संहिता की धारा-14 के तहत वार्ता करने वाली यूनियन या वार्ता परिषद के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि अंतिम निर्णय से पहले परामर्श के मंच के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आ रही है। वर्ष 2016-17 में भी पीएलआर के मुद्दे पर एपेक्स जेसीसी में चर्चा हो चुकी है।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की विशेष बैठक: तीसरा विकल्प केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की विशेष बैठक बुलाने का है। जेबीसीसीआई में परंपरागत रूप से शामिल केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को बुलाकर वित्तीय वर्ष 2025-26 के पीएलआर पर विशेष चर्चा की जा सकती है। इसे मौजूदा परिस्थितियों में अंतरिम परामर्श व्यवस्था के रूप में अपनाया जा सकता है।

स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की वैधता पर उठ रहे सवाल

स्टैंडर्डाइजेशन कमेटी की मौजूदा स्थिति को लेकर कुछ सदस्यों और जानकारों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका तर्क है कि 11वें जेबीसीसीआई की अवधि समाप्त हो चुकी है।