शुभंकर, राजगंज: गंगापुर गांव अब तक कोरोना के दस्तक से कोसों दूर है। इस गांव में एक भी संक्रमित व्यक्ति अब तक नहीं मिला है। यहां के ग्रामीणों की सजगता एवं जागरूकता के सभी कायल हैं। शुद्ध वातावरण कोरोना संक्रमण रोकने के सहायक सिद्ध हो रही है। ग्रामीण जिक एवं विटामिन की दवाई नहीं लेते बल्कि मेहनत से इम्युनिटी बनाए रखते हैं। आज भी महिलाएं पहाड़ चढ़कर सूखी लकड़ियां चुन कर लाती हैं, वहीं पुरूष वर्ग खेत में पसीना बहाते हैं।

जागरूकता एवं सतर्कता की बात करें तो शहर के लोगों को गंगापुर के ग्रामीणों ने मात दे दी है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश टुडू ने कहा कि ग्रामीण सप्ताह में एक दिन शनिवार को राशन एवं जरूरी सामान खरीदने बाजार जाते हैं। महिला हो या पुरूष घर आने के बाद तालाब जाकर नहाने के बाद अंदर प्रवेश करते हैं। खुले आसमान के नीचे बैठकी युवाओं का बैठकर संवाद) के दौरान शारीरिक दूरी के साथ मास्क एवं गमछा का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाता है। जीतराम टुडू ने कहा कि गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पर हमलोग सतर्क हैं। पेड़ के नीचे बैठे युवक दूसरी जगह से आनेवालों से वजह पूछते हैं। अरुण हेम्ब्रम ने कहा कि इस वर्ष गांव का एक भी व्यक्ति दूसरे राज्यों में काम करने नहीं गया। सभी स्थानीय जगहों में काम कर रोजगार कर रहे हैं। बिनोद टुडू ने कहा कि कोरोना संक्रमण से गांव के लोग सतर्क हैं। इससे बचने एवं दूर रखने के लिए ग्रामीणों को कोविड गाइडलाइन का पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

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गंगापुर पहचान का कोई मोहताज नहीं

पिछले वर्ष लॉकडाउन में ग्रामीणों की हौसला को कोयलांचल ने सलाम किया था। ग्रामीण कठिन मेहनत कर ढुहू नाला पहाड़ काटकर 2 किमी सड़क बना दिया था। श्रमदान में महिलाओं ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस कार्य में पेड़ को क्षति नही पहुंचाई गई थी और ना ही किसी प्रकार की मशीन का प्रयोग किया गया था। सड़क बन जाने के बाद 35 किमी की दूरी मात्र 3 किमी में सिमट गई। सड़क बनने के फायदा यह हुआ कि पहले ग्रामीणों को गिरिडीह जिला में रिश्तेदार के यहां जाने के लिए सोचना पड़ता था। अब आराम से आ जा रहे है, लेकिन विडंबना की बात है कि सड़क बारिश के कारण टूट रहा है।

Edited By: Jagran