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जादू शो के बाद चिरकुंडा नगर परिषद में बड़ा बखेड़ा! पूर्व उपाध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच धक्का-मुक्की

Published: Wed, 02 Sep 2026 01:00 PM (IST)

जादू शो के किराए विवाद को लेकर चिरकुंडा नगर परिषद कार्यालय में हंगामा हुआ, जिसमें जादूगर किस्मत कुमार ने पूर्व उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।

HighLights

  1. जादू शो के किराए को लेकर नगर परिषद में हंगामा।

  2. पूर्व उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह पर दुर्व्यवहार का आरोप।

  3. उपाध्यक्ष विजय यादव और जयप्रकाश सिंह में धक्का-मुक्की।

जागरण संवाददाता, चिरकुंडा (धनबाद)। चिरकुंडा नगर परिषद के टाउन हॉल में आयोजित जादू कार्यक्रम के बाद मंगलवार को किराये के विवाद को लेकर नगर परिषद कार्यालय में जमकर हंगामा हुआ। जादूगर किस्मत कुमार ने पूर्व उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता जयप्रकाश सिंह पर गाली-गलौज व अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया। शिकायत को लेकर नगर परिषद उपाध्यक्ष विजय यादव और जयप्रकाश सिंह के बीच भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की हुई।

किस्मत कुमार ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और उपाध्यक्ष विजय यादव को लिखित शिकायत देकर बताया कि उन्होंने नगर परिषद के टाउन हॉल को जादू कार्यक्रम के लिए किराये पर लिया था। 

आमदनी नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान 

कार्यक्रम से अपेक्षित आमदनी नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ। इसी कारण वह मंगलवार को उपाध्यक्ष से मिलकर टाउन हॉल का किराया माफ करने या कम करने का अनुरोध करने पहुंचे थे।

उपाध्यक्ष ने उन्हें नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी से मिलकर अपनी समस्या रखने की सलाह दी। इसके बाद किस्मत कुमार अध्यक्ष के कक्ष में पहुंचे, जहां पहले से जयप्रकाश सिंह मौजूद थे। किस्मत कुमार का आरोप है कि वहां उनके साथ गाली-गलौज और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।

बाद में उन्होंने उपाध्यक्ष को घटना की जानकारी दी। पूछताछ के दौरान जयप्रकाश सिंह का नाम सामने आने पर विजय यादव ने उनसे इस संबंध में सवाल किया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और कथित रूप से धक्का-मुक्की हुई।

कार्यालय में हस्तक्षेप पर भी उठाए सवाल

उपाध्यक्ष विजय यादव ने आरोप लगाया कि पूर्व उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह बार-बार नगर परिषद कार्यालय आकर फाइलों और सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यालय जनता की समस्याओं के समाधान के लिए है। यहां किसी के साथ अभद्र व्यवहार और सरकारी कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।