धनबाद, जेएनएन। निजी विद्यालयों के बच्चे एक के बाद एक लगातार स्कूल को अलविदा कह रहे हैं। वहां से निकलकर बच्चे सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं। बच्चों के स्कूल छोड़ने के कारण अब निजी विद्यालयों की चिंता बढ़ने लगी है जिसके बाद गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से गुहार लगाई है। गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों का दर्द है कि बिना टीसी ( विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र) के बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में लिया जा रहा है। जबकि निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों ने कोरोना काल के दौरान फीस जमा नहीं किया है। झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला सचिव इरफान खान ने इस मामले में चिंता जाहिर करते हुए धनबाद जिला शिक्षा पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। इरफान खान ने मांग की है कि बगैर स्थानांतरण प्रमाण पत्र के सरकारी विद्यालयों में बच्चों का दाखिला नहीं लिया जाए।

निजी विद्यालय संचालकों का दर्द

इरफान ने कहा कि पिछले 16 महीने से कोविड-19 के कारण राज्य के सभी विद्यालय को बंद करने का सरकारी आदेश दिया गया और ऑनलाइन क्लास को पढ़ाने हेतु आदेश जारी किया गया। तभी से विद्यालय बंद हैं और ऑनलाइन पढ़ाई चालू है। तब से लेकर अभी तक गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय ऑनलाइन बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा देने के बाद भी मासिक शुल्क विद्यालय में अभिभावकों के द्वारा जमा नहीं दिया जा रहा है। जिसके कारण लाखों रुपए सभी विद्यालय का मासिक शुल्क बकाया है। वहीं दूसरी ओर सरकारी विद्यालय में बिना स्थानांतरण प्रमाण पत्र के नामांकन लिया जा रहा है।

बगैर टीसी नामांकन पर रोक की मांग

निजी विद्यालयों में कुछ वैसे बच्चे हैं जिन्होंने ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण की और मासिक शुल्क भी जमा नहीं किया,  बिना स्थानांतरण प्रमाण पत्र के सरकारी विद्यालय में चले गए। उन्होंने डीईओ से अनुरोध है कि बिना स्थानांतरण प्रमाण पत्र के सरकारी विद्यालय या संबद्धता प्राप्त निजी विद्यालयों में नामांकन पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही बिना स्थानांतरण प्रमाण पत्र का नामांकन लेने हेतु विभागीय आदेश जारी किया जाए। ताकि जिस विद्यालयों में बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी गई थी उसका मासिक बकाया शुल्क जमा लिया जा सके।

Edited By: Mritunjay