धनबाद, जेएनएन। बंद हो चुकी 22 लाख 16 हजार 830 रुपये की करेंसी को नए नोट में बदलकर काला धन को सफेद बनाने के आरोप में सीबीआइ की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा ने दो लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। इनमें शिव कुमार सिंह, जीडीएसएमडी उधवा राजमहल एचपीओ दुमका, इग्नेसियस हेंम्ब्रम-ट्रेजरर, एचपीओ दुमका शामिल हैं।

यह है आरोप: नोट बंदी के बाद बैंक व पोस्ट ऑफिस सीबीआइ के राडार पर थे। इसी कड़ी में सीबीआइ को गुप्त सूचना मिली थी कि शिकारीपाड़ा दुमका पोस्टऑफिस में बड़े पैमाने पर बंद हुए पुराने 500 एवं 1000 के नोट को नए नोट में बदलने का गोरखधंधा हो रहा है। सीबीआइ ने मामले की जांच पड़ताल की तो इस गोरखधंधे में दुमका पोस्टऑफिस के सब पोस्टमास्टर समेत कई लोगों की संलिप्तता सामने आई। जिसके बाद सीबीआइ ने 29 जून 2018 को प्राथमिकी दर्ज की थी।

नोटबंदी के बाद बदल डाले 47 लाख रुपये : सीबीआइ ने चार्जशीट में दावा किया कि भारत सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 500 व 1000 के नोट जो 2005 से पहले व 2005 तक जारी किए गए थे उसे अवैध घोषित कर दिया था। सरकार ने उसके बाद 4000 हजार रुपये तक पुराने 500 व 1000 रुपये के नोट वैध कागजात व सत्यापन के बाद बदलने की छूट दी थी। जिसका फायदा उठाकर उपरोक्त अधिकारियों ने साजिश के तहत 10 नवंबर 2016 से 20 नवंबर 2016 के दौरान कुल 47 लाख 26 हजार के पुराने 500 तथा 1000 के नोट को वैध नोट से बदल दिया। 

Posted By: Sagar Singh

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