नबाद/कोलकाता, जेएनएन। संगीत नाटक से सम्मानित प्रसिद्ध युवा लोकगायिका चंदन तिवारी को भोजपुरी कोकिला सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पश्चिम बंग भोजपुरी परिषद की ओर से कोलकाता में एक समारोह आयोजित कर दिया गया। चंदन को यह सम्मान भोजपुरी लोकगीतों को स्त्रीविरोधी छवि से मुक्त कराने के लिए किए गए प्रयास और उसमें योगदान के लिए प्रदान किया गया।

सम्मान मिलने के बाद चंदन ने कहा कि यह भरोसे का सम्मान है। मैं कोशिश करूंगी कि ऐसे सम्मान के मान मर्यादा की रक्षा आजीवन करुं। चंदन को यह सम्मान कोलकाता के महाजाति सदन में एक भव्य समारोह आयोजित कर बंगाल पुलिस के महानिदेशक मृत्युंजय सिंह, भोजपुरी के विद्वान लेखक अनिल ओझा निरद, परिषद के जेपी सिंह और सभाजीत मिश्र द्वारा प्रदान किया गया।

बताते चले कि अभी हाल ही में चंदन तिवारी को दो प्रतिष्ठित सम्मान मिला था। भारत सरकार के संगीत नाटक अकादमी द्वारा बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार दिया गया था। उसके पहले बीएजी फिल्म्स के द्वारा श्रेष्ठ पारंपरिक लोकगायिका का सम्मान चंदन तिवारी को मिला था।

मां से मिली संगीत की शिक्षा : भोजपुरी, नागपुरी, मगही व हिंदी भाषा में लोक गीत व भजन के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी चंदन तिवारी के पिता कुंवर सिंह कालोनी चास निवासी ललन तिवारी एचएससीएल में कार्यरत थे। माता रेखा तिवारी लोक गीत व भजन गाती हैं। वे अपनी मां को गुरु मानती हैं।

टेलीविजन के रियालटी शो में लोकगीत पेश कर बनाई : मां से मिली प्रेरणा से ही वें बचपन से ही भोजपुरी व हिंदी गीत गुनगुनाती थी। माता के सान्निध्य में लोकगीत में महारथ हासिल किया। वहीं बाद में टेलीविजन के रियालटी शो में लोकगीत पेश कर घर-घर तक अपनी पहचान बनाई।   

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