धनबाद, जेएनएन। कोल इंडिया की 11 खदानों की पहचान सीएमबी का उत्पादन के लिए की गई है। दोनों ही कंपनियां संयुक्त  रूप से इस पर काम करेगी। ओएनजीसी और कोल बेड मिथेन (सीबीएम) मतलब कोयले के भंडार में मौजूद जहरीली गैस का दोहन कोयला उत्पादन करने के पहले करने का काम किया जाएगा। उसके बाद कोयला का उत्पादन किया जाएगा। इससे खान दुर्घटना की आशंका काफी कम हो जाएगी। 

बताया जाता है कि प्रारंभ में ओएनजीसी गैस का उपयोग करेगा फिर कोल इंडिया उनसे कोयला निकालेगा। बीसीसीएल की चार खदानें भी इनमें शामिल है। इनमें से मुनीडीह कपुरिया क्षेत्र की खदानें शामिल है। इसके अलावा ईसीएल की रानीगंज क्षेत्र में पडऩे वाली कई खदानों को भी इसमें शामिल किया गया है। 

कोल इंडिया के साथ अलावा ओएनजीसी, स्टील अथॉरिटी ऑफ  इंडिया लिमिटेड का पर्वतपुर कोयला ब्लॉक विकसित किया जाएगा। झारखंड के झरिया, बोकारो के पर्वतपुर, नार्थ कर्णपुरा में इसका बड़ा भंडार है। पश्चिम बंगाल के रानीगंज क्षेत्र में भी गैस का भंडार है। इससे पावर प्लांटों में बिजली उत्पादित की जाएगी। 

मुनीडीह में मिथेन गैस प्लांट के लिए फिर होगा टेंडर : बीसीसीएल में मुनीडीह के कोल माइंस मिथेन (सीएमएम) प्रोजेक्ट के लिए जारी निविदा में किसी भी एजेंसी ने हिस्सा नहीं लिया। प्रबंधन फिर से निविदा जारी करने की तैयारी में है। इस संबंध में सीबीएम प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी जीएम बीसी नायक, सीएमपीडीआइ, जीएम प्रोजेक्ट एंड प्लानिंग के अलावा अन्य अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में सीबीएम प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा के बाद कई और प्रोजेक्ट लगाने पर विचार किया गया। मुनीडीह में कोल बेड मिथेन, कोल माइंस मिथेन प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। मुनीडीह क्षेत्र में मौजूद मिथेन गैस के भंडार के दोहन के साथ-साथ खदान हादसों में कमी आएगी। 60 करोड़ की लागत से दो मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए प्लांट लगाने की योजना है।

सीबीएम का कहां कितना भंडार : 

-  झरिया - 23 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस

- नार्थ कर्णपुरा - 28 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस

- बोकारो - 23 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस

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Posted By: mritunjay

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