BCCL के रिजेक्ट कोयले के पुनर्मूल्यांकन पर कैग की आपत्ति, 135 करोड़ के आकलन पर सवाल
Coal India: बीसीसीएल द्वारा वर्षों से शून्य मूल्य पर रखे रिजेक्ट कोयले के पुनर्मूल्यांकन पर कैग ने सवाल उठाए हैं, ...और पढ़ें

बीसीसीएल में रिजेक्ट कोयले के मूल्यांकन में CAG ने पकड़ी गड़बड़ी। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
बीसीसीएल ने रिजेक्ट कोयले का 135 करोड़ रुपये में पुनर्मूल्यांकन किया।
कैग ने शून्य मूल्य से अचानक वृद्धि पर गंभीर सवाल उठाए।
मूल्यांकन दरों में अंतर और वास्तविक बिक्री मूल्य पर आपत्ति।
जागरण संवाददाता, धनबाद। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की वाशरियों में वर्षों से पड़े रिजेक्ट कोयले का मूल्यांकन अब कंपनी के लिए बड़ा लेखा सवाल बन गया है। जिस स्टाक को लंबे समय तक खातों में शून्य मूल्य पर रखा गया, वित्तीय वर्ष 2025-26 में उसका पुनर्मूल्यांकन कर 135.15 करोड़ रुपये की इन्वेंटरी में शामिल कर दिया गया। कैग और वैधानिक लेखा परीक्षकों ने इस बदलाव के आधार पर सवाल उठाए हैं।
खास बात यह है कि भोजूडीह में रिजेक्ट कोयले की वास्तविक बिक्री करीब 377 रुपये प्रति टन की दर से हुई, जबकि पुराने स्टॉक के अलग-अलग लाट का मूल्यांकन करीब 410 से 695 रुपये प्रति टन तक किया गया। अब इसी अंतर और मूल्यांकन की पद्धति का जवाब कंपनी से मांगा गया है।
कंपनी ने पूरे तर्क के साथ जबाव दिया है। वहीं दूसरी तरफ इस बीच बीसीसीएल ने सितंबर 2026 की ई-नीलामी की घोषणा कर दी है। 18 सितंबर को एमएसटीसी के माध्यम से पहले चरण की नीलामी होगी। इसमें करीब 6.97 लाख टन कोयला और कोयला उत्पाद बिक्री के लिए रखे गए हैं।
भोजूडीह वाशरी से ही दो लाख टन अनग्रेडेड कोयला/रिजेक्ट शामिल है। यानी जिस रिजेक्ट कोयले के मूल्यांकन पर कैग ने सवाल उठाए हैं, उसी श्रेणी का बड़ा स्टॉक अब बाजार में बिक्री के लिए आने वाला है।
बीसीसीएल के मार्केटिंग एंड सेल्स डिवीजन ने 11 सितंबर को जारी सूचना में बताया है कि नीलामी में मुनीडीह, न्यू पाथरडीह, भोजूडीह, दुग्धा वाशरी और बीसीसीएल-टाटा स्टील वाशिंग वेंचर से कोयला उपलब्ध कराया जाएगा।
सफल बोलीदाताओं को निर्धारित भुगतान और जरूरी दस्तावेज 30 सितंबर 2026 तक जमा करने होंगे।
कैग की आपत्ति का केंद्र क्या है?
आडिट की सबसे बड़ी चिंता यह है कि लंबे समय तक शून्य मूल्य पर दर्ज रिजेक्ट कोयले को अचानक करोड़ों रुपये का मूल्य कैसे मिला। 31 मार्च 2026 तक बीसीसीएल की कुल इन्वेंटरी करीब 3,046.88 करोड़ रुपये थी। इसमें पुनर्मूल्यांकित रिजेक्ट कोयले का 135.15 करोड़ रुपये का मूल्य भी शामिल किया गया।
आडिट में मूल्यांकन की दरों में अंतर को भी गंभीरता से लिया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार कुछ लॉट का मूल्य करीब 410 रुपये प्रति टन, जबकि कुछ का करीब 695 रुपये प्रति टन निर्धारित किया गया। दूसरी ओर कुछ रिजेक्ट स्टॉक अभी भी शून्य मूल्य पर दर्ज है।
ऐसे में सवाल उठता है कि अलग-अलग लाट के लिए दर तय करने में गुणवत्ता, ग्रेड, नमी, राख की मात्रा, स्टॉक की उम्र, बाजार भाव या बिक्री की संभावना में से किन मानकों को आधार बनाया गया। यदि अलग-अलग गुणवत्ता के कारण कीमत बदली गई तो उसका दस्तावेजी आधार क्या था, यह भी महत्वपूर्ण है।
377 रुपये की वास्तविक बिक्री बनी कंपनी के जवाब का आधार
बीसीसीएल ने ऑडिट के जवाब में भोजूडीह वाशरी की बिक्री का हवाला दिया है। कंपनी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में वहां करीब 4.70 लाख टन रिजेक्ट कोयले का ग्रेड विश्लेषण कराया गया था। इसमें से 88,069 टन कोयला करीब 377 रुपये प्रति टन की दर से बेचा गया।
कंपनी का तर्क है कि वास्तविक बिक्री से यह प्रमाणित होता है कि रिजेक्ट कोयले का बाजार मौजूद है और उसका आर्थिक मूल्य है। इसी वास्तविक बिक्री को आधार बनाकर पुराने स्टॉक के मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई गई।
