जागरण संवाददाता, धनबाद: अंतरराज्यीय बस स्टैंड, स्टेशन के साथ ही अन्य जगहों से टिकटों की बुकिंग करने वाले एजेंटों की मनमानी अब नहीं चलेगी। उन्हें यात्रियों का टिकट काटने से पहले लाइसेंस लेना होगा। परिवहन विभाग ने इसका फरमान जारी कर दिया है। इस नियम की अनदेखी करने वाले एजेंटों पर सख्त कार्रवाई होगी। यह नियम लागू होने के बाद बस एजेंटों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी ओर बस यात्रियों को राहत मिल जाएगी।

गौरतलब है कि आवाजाही के लिए यात्री सड़क मार्ग अधिक निर्भर होते हैं और इसका फायदा बस ऑपरेटर और बुकिंग एजेंट लंबे समय से उठा रहे हैं। बस एजेंटों की मनमानी को रोकने के लिए परिवहन विभाग ने इसकी पहल कर दी है।

90 से अधिक हैं बुकिंग एजेंट: बस अड्डा धनबाद से झारखंड के रांची, जमशेदपुर, बोकारो सहित अन्य जिले तथा बिहार व बंगाल के अलग-अलग हिस्सों तक प्रत्येक दिन 170 बसें खुलती हैं। इसमें प्रति दिन सात से आठ हजार यात्री बसों में आवाजाही कर रहे हैं। इतने बस यात्रियों को सुविधा दो दर्जन से अधिक बस ट्रांसपोर्टर्स के करीब 90 एजेंटों द्वारा दी जा रही है। अधिक किराया वसूलने और एजेंटों की मनमानी की कई बार लिखित व मौखिक रूप से शिकायतें परिवहन कार्यालय को मिलती है। यात्री बसों में टिकट बुकिंग एजेंट की आड़ में चल रही अवैध उगाही और गुंडा तत्वों से निबटने के लिए कमर कस ली है। परिवहन विभाग ने बस संचालक और संगठन के साथ बैठक कर एजेंटों की पूरी जानकारी मांगी है। वहीं जिला परिवहन पदाधिकारी के निर्देश पर बुकिंग एजेंट की जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है।

लाइसेंस होगा अनिवार्य, बाहर किए जाएंगे अवैध एजेंट: जिला परिवहन पदाधिकारी ओमप्रकाश यादव ने बताया कि बुकिंग एजेंट के लिए परिवहन विभाग से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। जिले में बगैर लाइसेंस के बुकिंग एजेंट का कारोबार सालों से बेरोकटोक चल रहा। यात्रियों से मारपीट और दुर्व्‍यवहार की शिकायत आने पर विभागीय सक्रियता रहती है फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। अब परिवहन विभाग बुकिंग एजेंट की लिस्टिंग शुरू कर दी है। जो भी अवैध एजेंट होंगे, उन्हें बाहर किया जाएगा।

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