गिरिडीह, जेएनएन। लॉकडाउन के कारण ससुराल में फंसे अमित तिवारी को इसकी कतई उम्मीद नहीं थी कि उन्हें इस तरह की कठिन डगर पर चलना पड़ेगा। जब ससुराल वालों ने ताना मारना शुरू किया और खासकर ससुर ने घर चले जाने को कह दिया तो इस अपमान को बर्दाश्त करना मुश्किल था। अमित की पत्नी भी नैहर में अपमान को बर्दाश्त नहीं कर सकी। पति को साथ खड़ी हो गई। इसके बाद दोनों तीन बच्चों को लेकर बोकारो जिले के नावाडीह से साइकिल से अपने घर मध्य प्रदेश के मैहर के लिए निकल पड़े। 

लॉकडाउन से पहले पत्नी व बच्चों को लेकर बोकारो के नवाडीह ससुराल पहुंचे 55 वर्षीय अमित तिवारी ससुराल में हुए अपमान को सह नहीं पाया। वह गुरुवार को साइकिल के सहारे तीन बेटी और पत्नी को लेकर लगभग साढ़े छह सौ किलोमीटर मध्य प्रदेश के मैहर के लिए निकल पड़ा। इस दंपती ने गुरुवार को पारसनाथ रेलवे स्टेशन पहुंचकर रात बिताई। शुक्रवार तड़के साइकिल के सहारे अपने गंतव्य के लिए निकल गए। इस दौरान पूछे जाने पर दंपती ने बताया कि उनका घर मध्य प्रदेश के मैहर में है। मार्च महीने में ही बच्चों के साथ वे बोकारो नवाडीह स्थित कोठी गांव ससुराल पहुंचे थे। इसी बीच लॉकडाउन की घोषणा हो गई। मजबूरन उन्हें ससुराल में ही रहना पड़ा। इधर, ससुराल में लंबे समय तक रहने पर किसी बात को लेकर ससुराल वालों से विवाद हो गया। जिसे देख लगा कि अब ससुराल में रहना उचित नहीं है।

यात्री वाहन नहीं चलने के कारण अमित ने गांव के एक व्यक्ति से साइकिल खरीदी और पत्नी व तीनों बच्चों के संग अपने घर मध्य प्रदेश मैहर के लिए निकल गया। पत्नी बबीता तिवारी ने बताया कि पति का अपमान वह कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। मायके में पति के साथ हुए अपमान से मैं दुखी हूं लेकिन आत्मसम्मान के लिए मैं अपने बच्चों व पति के साथ साइकिल के सहारे ही ससुराल जाना उचित समझा। हालांकि, बबीता ने बताया कि इस दौरान उसके रिश्तेदारों ने रोकने की कोशिश की और समझाया भी, लेकिन आत्मसम्मान ने यहां रुकने की इजाजत नहीं दी।

कहने को तो अमित तिवारी साइकिल से परिवार संग मैहर के लिए निकले हैं लेकिन वह पैदल ही चल रहे हैं। साइकिल पर पत्नी और तीन बच्चों को लेकर चलना कठिन है। इसलिए कभी साइकिल पर बैठकर चलते हैं तो कभी साइकिल को पैदल ही खींचते हैं। हां, साइकिल बच्चों की ढुलाई में काम आ रही है। दो बच्चे साइकिल के पिछले स्टैंड में बंधे बास्केट में बैठे रहते हैं।

डुमरी के बीडीओ सोमनाथ बंकीरा को जब इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने कहा कि दंपती अगर यहां रुकना चाहें तो उनके लिए कस्तूरबा विद्यालय में रहने की व्यवस्था की जाएगी। लॉकडाउन टूटने के बाद उसे किसी गाड़ी से उसके गंतव्य स्थान तक भेजे जाने की व्यवस्था की जाएगी। बावजूद दंपती ने किसी की एक ना सुनी और अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गया। अमित ने अपनी साइकिल के स्टैंड पर प्लास्टिक का बास्केट बांध रखा था। जिसमें दोनों बच्चियों को बैठाए रखा है। जबकि पत्नी दुधमंही बच्ची को गोदी पर लेकर चल दी। रास्ते में जिसकी भी नजर इस दंपती पर पड़ी वे उनके परिजनों को कोसते नजर आए।

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