धनबाद : भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के विरोध में विपक्षी दलों का संयुक्त अभियान तेज हो रहा है। गुरुवार को दुमका जिले के दुमका सदर, जामा, काठीकुंड, रामगढ़, मसलिया, रानीश्वर, शिकारीपाड़ा एवं जरमुंडी प्रखंड परिसर में झामुमो, कांग्रेस, जेवीएम, राजद, माकपा, भाकपा समेत अन्य विपक्षी दलों ने संयुक्त रुप से धरना देकर भूमि अधिग्रहण बिल को जनहित में वापस लेने की मांग की। पार्टी नेताओं से भाजपा सरकार पर जमकर प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा की सरकार यहां के आदिवासी व मूलवासियों को उनके जमीन से बेदखल कर पूंजीपतियों को जमीन देने की साजिश रच रही है।

दुमका सदर प्रखंड परिसर में झामुमो के प्रखंड अध्यक्ष कयूम अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित धरना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झामुमो के केंद्रीय महासचिव विजय कुमार ¨सह ने कहा कि केंद्र व राज्य की सरकारें झारखंड की जनता का भला नहीं चाहती हैं। केंद्र व राज्य की सरकारों की निगाह यहां के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर है जिसे वह पूंजीपतियों को सौंपना चाहती है। झामुमो ने लंबे संघर्ष के बाद अलग राज्य का गठन किया है। पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन ने यहां के जल, जंगल और जमीन के साथ आदिवासी और गरीब-गुरुबों के हक व अधिकार के लिए पूरा जीवन दिया है। उनके इस बलिदान को भाजपा खत्म करना चाहती है, जिसे हरगिज सफल नहीं होने देंगे। झाविमो के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र ¨सह ने कहा कि भाजपा पूंजीपतियों की सरकार है। भाजपा की मंशा है कि यहां की जमीन को जबरन लेकर पूंजीपतियों को सौंप दिया जाए लेकिन, ऐसा हरगिज संभव नहीं है। भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को दोबारा वापस लेना ही होगा।

जामा प्रखंड मुख्यालय में कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष प्रेम कुमार साह ने कहा कि रघुवर सरकार की नापाक मंशा को किसी भी सूरत में सफल नहीं होने देंगे। मसलिया प्रखंड परिसर में झामुमो नेता सुभाष कुमार ¨सह ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल झारखंड विरोधी है। शिकारीपाड़ा प्रखंड मुख्यालय में विधायक नलिन सोरेन ने कहा कि झारखंड की वर्तमान सरकार आदिवासी विरोधी है तथा इसमें झारखंड के बाहर के नेताओं का वर्चस्व है। सरकार आदिवासी विराधी कार्य कर रही है। बिल के माध्यम से जमीन हड़पने के प्रयास में है।

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भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल से विपक्षी दलों की खत्म हो जाएगी राजनीति: डॉ.लुईस

गुरुवार को दुमका परिसदन में सूबे की समाज कल्याण मंत्री डॉ.लुईस मरांडी ने सपाट लहजे में कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल से विपक्षी दलों की राजनीति खत्म होने वाली है। इसी भयवश सभी विपक्षी दल एकमत होकर बिल का विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दल विकास की नहीं नकारात्मक राजनीति कर रहे हैं और अब इस बात को यहां की जनता भी समझ रही है। एक सवाल पर डॉ.लुईस ने कहा कि भूमि संशोधन बिल का विरोध यहां के आदिवासी नहीं बल्कि आदिवासी नेता कर रहे हैं जो यह नहीं चाहते हैं कि आदिवासियों का समग्र विकास हो। विपक्षी दल जान बूझकर ऐसे मुद्दों को उभार कर राजनीति रोटी सेंकना चाहते हैं। डॉ.लुईस ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल में यह स्पष्ट तौर पर इंगित है कि निजी उपयोग के लिए या उद्योग के लिए जमीन लेने पर संशोधन का कोई लाभ नहीं मिलेगा। संशोधन से झारखंड का समग्र विकास हो सकेगा और यह राज्य भी विकास के मामले में गुजरात की श्रेणी में होगा। प्रदेश मीडिया प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल में स्थानीय प्राधिकार या ग्राम सभा की सहमति व परामर्श लेने का प्रावधान निहित है। विपक्षी दल अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए जनता के बीच भ्रम फैला रहे हैं। आदिवासी नेता रमेश हांसदा ने कहा कि विपक्ष झूठ का पु¨लदा लेकर घूम रहा है जिसका भाजपा करारा जवाब देगी।

Posted By: Jagran

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