राहुल मिश्रा, चासनाला : देश की सबसे अत्याधुनिक व अधिक क्षमता वाली नन कोकिग कोल वाशरी का निर्माण पाथरडीह कोल वाशरी में बीसीसीएल ने 131.65 करोड़ की लागत से किया था। लेकिन एक वर्ष में ही वाशरी को रा कोल की आपूर्ति करने में बीसीसीएल प्रबंधन का दम फूल रहा है। अक्टूबर महीने में अब तक महज 28 हजार टन कोयला की ही आपूर्ति किया जा सकी है। पर्याप्त कोयला नहीं रहने से मोनेट वाशरी का काम धीमी गति से चल रहा है। आए दिन कोयला के अभाव में वाशरी प्लांट बंद रहने से मजदूरों को बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है। इससे दो सौ मजदूरों के समक्ष रोजगार छीन जाने का खतरा मंडराने लगा है।

बताते हैं कि बीसीसीएल व मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड न्यू दिल्ली की ओर से इस पाथरडीह कोल वाशरी में पांच मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली नन लिक कोल वाशरी का निर्माण किया गया है। उद्घाटन 16 मार्च 2018 को कोयला मंत्रालय के कोल सचिव सुशील कुमार ने किया था। जुलाई 2020 से वाशरी में नन कोकिग कोल की धुलाई शुरू हुई। प्रतिमाह साढ़े चार लाख टन की जगह मिल रहा महज डेढ़ लाख टन कोयला :

इस वाशरी को प्रतिदिन 15 हजार टन रा कोल की आवश्यकता है। प्रतिमाह करीब साढ़े चार लाख टन कोयला बीसीसीएल प्रबंधन को उपलब्ध कराना है। लेकिन वाशरी का दुर्भाग्य कहे कि 16 महीनों में किसी भी महीने डेढ़ लाख टन कोयला की आपूर्ति नहीं की गई। सबसे अधिक रा कोल इसी साल जुलाई माह में एक लाख 49 हजार 400.06 टन आपूर्ति की गई। सबसे कम मार्च माह में 401.79 टन कोयला की आपूर्ति की गई। कोयला की आपूर्ति में कमी होने के कारण वाशरी को प्रतिमाह लगभग एक करोड़ का घाटा उठाना पड़ रहा है। सूत्रों की माने तो मोनेट वाशरी को जुलाई माह में 98 लाख, अगस्त में एक करोड़ 50 लाख व सितंबर में एक करोड़ 30 लाख का नुकसान हुआ है। कोयला नहीं रहने के कारण महीने में 10-15 दिन वाशरी में काम बंद रहता है। लगातार बारिश, जर्जर सड़क व लोदना क्षेत्र में कोयले की कमी के कारण समय पर कोयला की आपूर्ति नहीं हो पाई है। उच्च प्रबंधन के आदेश पर कतरास से रैक के माध्यम से कोयला की आपूर्ति की जा रही है। वाशरी में कोयले की कमी नहीं होने दी जाएगी।

- विपिन सिंह, परियोजना पदाधिकारी, पाथरडीह।

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