झारखंड में दिल दहलाने वाली घटना: 8 साल के इंतजार के बाद मिली नौकरी, ज्वाइनिंग के कुछ घंटों बाद मौत
बीसीसीएल में 8 साल के लंबे इंतजार के बाद नौकरी मिलने पर योगदान पत्र जमा करने वाले रंजीत कुमार महथा ...और पढ़ें
-1781749219386-1781749230842_m.webp)
घटना के बाद जुटे स्वजन। जागरण
HighLights
8 साल इंतजार के बाद बीसीसीएल में मिली नौकरी।
जॉइनिंग के कुछ घंटों बाद रंजीत की रहस्यमय मौत।
परिजनों ने आश्रित नौकरी और मुआवजे की मांग की।
संवाद सहयोगी, चासनाला। बीसीसीएल पूर्वी झरिया क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। आठ वर्षों तक नौकरी के लिए संघर्ष करने वाले रंजीत कुमार महथा को जैसे ही नियोजन मिला उसने मंगलवार को अपना योगदान पत्र जमा किया। कुछ ही घंटों बाद उसकी रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई।
बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य गेट के सामने रखकर स्वजन व स्थानीय नेताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। आश्रित को नौकरी व उचित मुआवजे की मांग को लेकर गेट जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
नियोजन प्रक्रिया पर उठे सवाल
पार्षद चंदन महतो, मौसम मोहंती, रंजय कुमार ने कहा कि वर्षों तक नियोजन प्रक्रिया लंबित रखने की वजह से आश्रितों को भारी मानसिक, आर्थिक व सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उनका आरोप था कि यदि नियोजन समय पर हुआ होता तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती। मृतक रंजीत महथा मंगलवार को पूर्वी झरिया क्षेत्रीय कार्यालय में अपना योगदान पत्र जमा करने के बाद मोहलबनी की ओर खाना खाने जा रहा था।
इसी दौरान रास्ते में उसकी अचानक मौत हो गई। मौत के कारणों का अब तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। घटना की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक व सनसनी फैल गई।
अनुकंपा नियुक्ति का 8 साल तक इंतजार
विदित हो कि रंजीत के पिता स्व. विमल कुमार बीसीसीएल कर्मी थे। उनके तीन पुत्र सुजीत कुमार, विश्वजीत कुमार व एक पुत्री टुन्नू चक्रवर्ती हैं। पिता के निधन के बाद उनकी पत्नी मृदुला देवी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी, लेकिन 25 मई 2018 को उनका भी निधन हो गया।
इसके बाद रंजीत ने आश्रित नियोजन के लिए लगातार आठ वर्षों तक क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर मुख्यालय तक दौड़-धूप की। लंबे संघर्ष के बाद उसे नौकरी का अवसर मिला। लेकिन नियोजन ग्रहण करने के कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत हो जाने से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
BCCL के गेट पर धरना
स्थानीय लोगों का कहना है कि बीसीसीएल में आश्रित नियोजन की प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि नौकरी पाने की प्रतीक्षा में लोगों की आधी उम्र गुजर जाती है। रंजीत की मौत ने एक बार फिर नियोजन प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष सोनू सिंह, मुख्तार खान, अख्तर खान, अशोक महतो, रंजीत यादव, मानिक बनर्जी, मनोज बनर्जी, हरेंद्र यादव, दिलीप बनर्जी, भुवन रवानी सहित बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठे रहे व गेट जाम रखा।
समाचार लिखे जाने तक प्रदर्शनकारियों व प्रबंधन के बीच महाप्रबंधक कार्यालय में वार्ता जारी थी। वार्ता में महाप्रबंधक टी पासवान, सुधांशु महाजन, अभिषेक झा मौजूद थे। विधि व्यवस्था को भौंरा ओपी प्रभारी सुमन सौरभ भी मौजूद है।
यह भी पढ़ें- Railway News: पुरी तक जाएगी धनबाद-भुवनेश्वर एक्सप्रेस, रांची-कामाख्या ट्रेन के बढ़ेंगे फेरे
यह भी पढ़ें- राज्यसभा चुनाव को लेकर रांची में हाई अलर्ट, होटलों से विधानसभा तक कड़ी निगरानी
