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पावर प्लांटों में कोयले का संकट, जरूरत का सिर्फ 48% स्टॉक; डिस्पैच बढ़ाने में जुटा बीसीसीएल

Published: Mon, 07 Sep 2026 06:19 PM (IST)

Power Plant Coal Crisis: देशभर के थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की भारी कमी के बीच, बीसीसीएल ने बिजली की ...और पढ़ें

कुसुंडा साइडिंग में कोयला डिस्पैच का जायजा लेते BCCL CMD मनोज कुमार अग्रवाल और अन्य। (फोटो जागरण)

कुसुंडा साइडिंग में कोयला डिस्पैच का जायजा लेते BCCL CMD मनोज कुमार अग्रवाल और अन्य। (फोटो जागरण)

HighLights

  1. थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की भारी कमी।

  2. बीसीसीएल ने कोयला डिस्पैच में तेजी लाई।

  3. सीएमडी ने साइडिंग पर क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए।

जागरण संवाददाता, धनबाद। Power Plant Coal Crisisदेशभर में चल रहे थर्मल पावर प्लांटों में कोयले की भारी कमी हो गई है। प्लांटों में कोयले का स्टॉक निर्धारित मात्रा के आधे से भी कम रह गया है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है।

दरअसल, मानसून के दिनों में कोयले की आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। 2 सितंबर तक बिजली की मांग काफी अधिक रही। वहीं, 50 से ज्यादा पावर प्लांटों में कोयले की कमी है। ये प्लांट करीब 224 GW (गीगावाट) बिजली उत्पादन की क्षमता रखते हैं।

2 सितंबर 2026 तक इन प्लांटों में 28.2 मिलियन टन (MT) कोयला उपलब्ध था, जबकि निर्धारित स्टॉक 58.7 MT होना चाहिए। यानी थर्मल पावर प्लांटों में जरूरत का सिर्फ 48 प्रतिशत कोयला ही उपलब्ध है, जो आधे (50 प्रतिशत) से भी कम है।

वर्तमान में उपलब्ध कोयले का स्टॉक 85 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर के हिसाब से करीब नौ दिनों की जरूरत के बराबर है। सामान्य तौर पर थर्मल पावर प्लांटों में करीब 19 दिनों के कोयले का स्टॉक होना जरूरी है।

कोयला कंपनियों ने बढ़ाई आपूर्ति की गति

वहीं, कोयले की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोयला कंपनियों ने सप्लाई की गति तेज कर दी है। पावर प्लांटों को कोयले की कमी किसी भी हाल में नहीं होने दी जाएगी। कोयला आपूर्ति की गति बढ़ा दी गई है और कोयला अधिकारियों को भी इस दिशा में गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई-बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि पावर प्लांटों को कोयले की कमी नहीं होने दी जाएगी। कोयला मंत्रालय की ओर से जो भी गाइडलाइन दी जा रही है, उसे हर हाल में धरातल पर उतारा जा रहा है।

इधर विद्युत क्षेत्र में कोयले की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने कोयला डिस्पैच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है।

कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार को कुसुंडा क्षेत्र के बीएनआर साइडिंग और बस्ताकोला क्षेत्र के बुर्रागढ़ साइडिंग का निरीक्षण कर कोयला डिस्पैच की स्थिति और परिचालन व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान सीएमडी ने बीएनआर साइडिंग से वर्तमान दो रेक प्रतिदिन के डिस्पैच को तत्काल बढ़ाकर 3.5 रेक प्रतिदिन करने के निर्देश दिए। वहीं, बुर्रागढ़ साइडिंग से वर्तमान 1.5 रेक प्रतिदिन के डिस्पैच को बढ़ाकर दो से तीन रेक प्रतिदिन करने को कहा।

इन निर्देशों का उद्देश्य विद्युत संयंत्रों की बढ़ती कोयला आवश्यकता के अनुरूप आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत करना है। सीएमडी ने दोनों साइडिंग पर डिस्पैच बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग, परिचालन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने तथा कोयले की निकासी और परिवहन में आने वाली संभावित बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया।

बीसीसीएल प्रबंधन का फोकस साइडिंग स्तर पर डिस्पैच क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कोयला निकासी की पूरी व्यवस्था को सुचारु बनाने पर है। विद्युत क्षेत्र में मांग बढ़ने के मद्देनजर कंपनी लगातार अपनी डिस्पैच व्यवस्था की समीक्षा कर रही है, ताकि बिजली संयंत्रों तक कोयले की पर्याप्त और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

कंपनी द्वारा साइडिंग की क्षमता बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से कोयला डिस्पैच में तेजी आने की उम्मीद है।

बीसीसीएल के ये प्रयास देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और विद्युत क्षेत्र को निर्बाध कोयला आपूर्ति उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मौके पर संबंधित एरिया के महाप्रंबधक व मुख्यालय के अधिकारी मौजूद थे।

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