जागरण संवाददाता, धनबाद। साहित्यिक प्रेम की ऐसी धुन लगी कि उम्र की बाधा भी पार कर गए। कविताएं लिखनी शुरू की तो पूरी किताब ही लिख डाली। 94 वर्ष के उम्र में अनंत नारायण का लेखन के प्रति जज्बा देखते बन रहा है। दरअसल तरुण हिंदू की ओर से 94 वर्षीय धनबाद के साहित्यकार अनंत नारायण की पुस्तक मन की तरंगें का लोकार्पण यहां के एक होटल में हुआ। इसमें अनंत नारायण की कविताओं का संकलन है। सभाध्यक्ष के रूप में डा मनमोहन पाठक ने अनंत नारायण की आजीवन कर्मठता, साहित्यिक रचना एवं धार्मिकता पर बखूबी प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि कवयित्री डा संगीता नाथ ने कहा कि अनंत नारायण ने नेपथ्य से अमृत रचनाओं को रचा। उन्होंने भावविभोर होकर अनंत नारायण की आंसू कविता का पाठ भी किया। सभी ने प्रशंसा की।

विशिष्ट अतिथि विधायक राज सिन्हा ने मन की तरंगें का विश्लेषण किया। बीआइटी सिंदरी के निदेशक डा डीके सिंह ने अनुभव साझा करते हुए पुस्तक की मौलिकता का बखान किया। तरुण हिंदू के संयोजक डा नील माधव दास ने अनंत नारायण लाल को लाइफ टाइम प्रशस्ति पत्र भेंट किया। पुस्तक की संपादक शुभारानी ने उत्तरीय और श्रीफल से मंचस्थ सभी अतिथियों एवं सभागार में उपस्थित संस्कार भारती के अध्यक्ष डा बी जगदीश राव, प्रो संजय सिंह, कवयित्री सुभद्रा गुप्ता, डा अशोक कुमार सिंह, हरीश जोशी, इन्द्रजीत सिंह, एनपी अंबष्ठ, सुनील गुप्ता, राजकुमार अग्रवाल, उज्जवल बनर्जी का स्वागत किया।

मंचस्थ अतिथियों, स्वजन, साहित्योदय आदि संस्थाओं ने अनंत नारायण का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन डा रागिनी भूषण ने किया। समारोह‌ का संचालन डॉ रागिनी भूषण ने किया। मनोज अंजन ने कविता के माध्यम से अपनी भावाभिव्यक्ति रखी। अपनी बात में शुभा रानी ने अनंत नारायण लाल के व्यक्तित्व और कृतित्व से अद्भुत परिचय कराया। मौके पर बालकृष्ण वर्णवाल, मनोज अंजन मौजूद थे।

Edited By: Mritunjay