धनबाद, आशीष सिंह। संग्रह टिकट, सिक्के या नोटों का ही नहीं होता, किसी भी विषय पर समझ के साथ सिलसिला बनाया जाए तो ये संग्रह इतिहास की धरोहर बन जाता है। कुछ इसी जज्बे के साथ कार्मिक नगर, धनबाद के रहने वाले अमरेंद्र आनंद आमंत्रण पत्रों का संग्रह करते हैं। आज उनके खजाने में इतिहास के कई यादगार इन्विटेशन यानी आमंत्रण पत्र जमा हो चुके हैं।

अमरेंद्र के पास 12 दिसंबर 1911 में हुए ऐतिहासिक 'दिल्ली दरबार' का आमंत्रण पत्र है जिसमें कोलकाता की जगह दिल्ली को भारत की राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया था। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की दो जून, 1953 को हुई ताजपोशी समारोह का आमंत्रण पत्र भी इनके खजाने में चार चाद लगा रहे हैं। वहीं, इनके पास 1961 के दो आमंत्रण पत्र हैं। इन आमंत्रण पत्रों के कागज, छपाई, इस पर छपे लेख उस समय के इतिहास की गवाही देते हैं। पहला आमंत्रण पत्र ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और राजकुमार फिलिप के सम्मान में जयपुर के महराजा सवाई मान सिंह द्वितीय द्वारा 22 जनवरी 1961 को सिटी पैलेस जयपुर में दिए भोज का है, जो राजमहल जयपुर द्वारा जारी किया गया था। इसमें आगंतुकों को फॉर्मल ड्रेस और बैज (डेकोरेशन) के साथ आने की ताकीद की गई है। दूसरा महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय (जयपुर के 10 वें महाराजा) के पुत्र और मानगढ़ के राजा महाराजा कुमार पृथ्वीराज सिंह व त्रिपुरा के महाराज कुमार रामेंद्र किशोर देववर्मा की पुत्री कुमारी देविका देवी के विवाह का है। यह शादी आठ मार्च, 1961 को राजमहल जयपुर में हुई थी। पूरी भव्यता के साथ हुआ यह समारोह उस दौर में चर्चा में रहा था। अमरेंद्र के खजाने में दो दर्जन से अधिक यादगार आमंत्रण पत्र हैं, जो अतीत के यादगार पलों को बया करते हैं।

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