जागरण संवाददाता, धनबाद: राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ कार्यालय में संघ मजदूर समस्या पर गंभीर है। महामंत्री ए के झा ने भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के सीएमडी और निदेशक कार्मिक से यह मांग किया है कि कंपनी के सभी डिस्पेंसरी और अस्पतालों की स्थिति में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध रहनी चाहिए। मेडिकल स्टाफ पर्याप्त रूप से रहना चाहिए।संडे के दिन कोलियरी चालू रहने पर हर प्रोजेक्ट में मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगानी चाहिए तथा साथ ही एंबुलेंस की व्यवस्था मजबूती से रखना चाहिए ताकि किसी भी स्थिति में श्रमिकों को कोई कठिनाई ना हो। आज के तारीख में मेडिकल स्टाफ की बहुत कमी है। एंबुलेंस का अभाव है। डॉक्टरों की संख्या कम है। संडे के दिन मेडिकल स्टाफ को ड्यूटी नहीं दिया जाता है जिससे श्रमिकों को काफी परेशानी होती है।किसी भी स्थिति में प्रबंधन का यह फैसला कहीं ना कहीं यह मजदूर विरोधी फैसला है। आगे उन्होंने कहा जहां उत्पादन बढ़ रहे हैं। कोयला चोरी रोकने की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। आउटसोर्सिंग कंपनियां मैनेजमेंट की कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से कंपनी की मशीन का कंपनी के डीजल का कंपनी के स्टाफ का अपने हित में उपयोग करते हैं और इसके नाम पर नाजायज बिल आउटसोर्सिंग कंपनियां ले रही है।इस पर भी निगाह रखने की आवश्यकता है।

हर कोलियरी में 1-1 श्रमिकों को अपने पदनाम के अलावे कई तरह के कार्य करने पड़ते हैं। लेकिन उन्हें अंतर वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है। उन्हें स्पेशल इंक्रीमेंट नहीं दिया जाता है। समय पर पदोन्नति नहीं दी जाती है। उनके कष्टों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। ऐसे श्रम शक्ति का प्रबंधन के अधिकारी सदुपयोग करने के बजाए दुरुपयोग कर रहे हैं। बाद में सारी बदनामी श्रमिकों के ऊपर रखने का प्रयास करते हैं जो दुखद है।इस कंपनी में कई महत्वपूर्ण पद रिक्त है। इन पदों पर शिक्षित नौजवानों की बहाली आवश्यक है। आईटीआई होल्डर की बहाली आवश्यक है। वर्षों से ऊंचे पद पर काम करने वाले श्रमिकों को कार्य अनुसार पदनाम नहीं दिया जा रहा है।जिनकी जमीन ली गई है उनको नियोजन नहीं दिया जा रहा है। मजदूरों के आवास मरम्मती का काम रुका हुआ है। आवास से ड्यूटी स्थल तक जाने के लिए पहले गाड़ी की व्यवस्था रहती थी। लेकिन आज के तारीख में ट्रांसपोर्टिंग की व्यवस्था नहीं की गई है। जिसे मजदूरो के जानमाल पर खतरा हो गया है। जो श्रमिक ठेका लोडिंग ट्रांसपोर्टिंग आउटसोर्सिंग में स्थाई प्रकृति के कार्य में लगे हुए हैं उन्हें एचपीसी का वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है ।उन्हें पीएफ का पासबुक नहीं दिया जा रहा है ।उन्हें कंपनी की मेडिकल सुविधा नहीं दी जा रही है।जो मानवता के विपरीत है।कानून के विपरीत है।जिससे श्रमिक परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

कंपनी में जितने कोऑपरेटिव है पहले इसमें उचित दाम पर राशन एवं आम उपभोक्ता की चीजें श्रमिक परिवार को तथा कोलियरी में रहने वाले लोगों को मिलता था लेकिन आज के तारीख में कापरेटिव सिर्फ पैसे लेन देन और सूद का व्यवसाय कर रही है। ऐसे कॉपरेटिव के द्वारा ना तो पासबुक यीशु किया जाता है। ना श्रमिकों को हिसाब दिया जाता है ।आकस्मिक मौत पर सारा बकाया उस परिवार पर दर्ज करके सूद सहित उनसे जबरन वसूला जाता है ।यह परंपरा बहुत गलत है। इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। मजदूर आर्थिक शोषण के शिकार ना हो इस पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए ताकि किसी भी स्थिति में मजदूर परिवार को आर्थिक और मानसिक शोषण का शिकार ना होना पड़े।सभी कोलियरी के सभी कॉलोनियों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है। पीने की पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। सामुदायिक भवन का रखरखाव ठीक नहीं है। सड़कों की मरम्मति नहीं हो रही है। जिससे मजदूरों के क्वालिटी ऑफ लाइफ पर, पर्यावरण पर, जिंदगी पर खतरा बना रहता है ।सुरक्षा प्रहरी का अभाव है। सुरक्षा प्रहरी के रिक्त पदों पर बहाली की जानी चाहिए।

देश का सबसे बड़ा सवाल नियोजन का है। रोजगार का सवाल है। आउटसोर्सिंग कंपनी में बहाली का भी एक पॉलिसी तय होना चाहिए ताकि अधिक से अधिक शिक्षित नौजवान जो धनबाद में रह रहे हैं चाहे वे किसी भी राज्य जिला के हो। वर्षों से यहां रह रहे हैं उन नौजवानों को रोजगार मिल सके। यह राष्ट्र के हित में है ।कंपनी के हित में है और यही हमारी परंपरा रही थी।

उन्होंने कहा अनुदान प्राप्त विद्यालय के शिक्षकों का वेतन लगभग 3 साल से जबरन बकाया रखा गया है ।कोल इंडिया लिमिटेड प्रबंधन वेलफेयर बोर्ड के निर्णय के बावजूद भी इस अनुदान प्राप्त विद्यालय के शिक्षकों को समय पर वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है।बार-बार अनुकूल आश्वासन दिया जाता हैं।लंबे संघर्ष के बाद दो-तीन वर्षों के बाद 6 महीने के वेतन का भुगतान किया गया। आर्थिक संकट से जूझ रहे शिक्षक परिवार भूख से मौत के शिकार हुए। दवाई के बिना मौत के शिकार हुए। इस राष्ट्रीय अपराध से बचने के लिए प्रबंधन को युद्ध स्तर पर पुरानी परंपरा के अनुसार पुराने निर्णय के अनुसार अनुदान प्राप्त विद्यालय के शिक्षकों को उसके वेतन का भुगतान हर तीन माह पर चेक द्वारा कर देना चाहिए।

कोरोना काल में आर्थिक संकट के समय जबकि देश की बेरोजगारी आजादी के बाद सबसे ऊंचे प्रतिशत में है। आज के तारीख में देश के 97% लोगों की आय घट गई है। करोडो लोग बेरोजगार हो गए हैं। भुखमरी और गरीबी बेरोजगारी देश के नौजवानों को तबाह कर रहा है। ऐसी स्थिति में प्रबंधन को इन शिक्षकों के साथ इंसाफ करते हुए वेतन का भुगतान कर देना चाहिए साथ ही जिन कर्मचारियों का मेडिकल बिल बकाया है। ग्रेच्युटी बकाया है ।युद्ध स्तर पर सभी मेडिकल बिल और बकाया ग्रेच्युटी का भुगतान एक माह के अंदर एकमुश्त एक बार कर देना चाहिए।

कंपनी के निदेशक कार्मिक और सीएमडी को हम इस बात की जानकारी देना चाहते हैं कि जब कंपनी बीआईएफआर में था।घाटा में था ।वर्ष 1996 में ए के गुलाटी सीएमडी ने युद्ध स्तर पर ग्रेच्युटी का बकाया भुगतान 1971 से लेकर 1996 तक एक मुश्त एक साथ करवा दिया था। इसके पहले रिटायरमेंट के 1 सप्ताह के अंदर श्रमिकों को ग्रेच्यूटी का पैसा मिल जाया करता था। लेकिन आज यह परंपरा तोड़ दी गई है। इस परंपरा को ठीक से पुराने रास्ते पर लाना होगा । कोई भी सेवा मुक्त श्रमिक परिवार रिटायरमेंट के बाद बकाया राशि के लिए आर्थिक मानसिक शारीरिक शोषण का शिकार ना हो ।इन सभी कार्यों में राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के सारे प्रतिनिधि प्रबंधन को हर स्तर पर रचनात्मक और सकारात्मक सहयोग करेंगे। ताकि सभी श्रमिकों को न्याय मिल सके। मजदूर राहत की सांस ले सके ।

बैठक में रामप्रीत यादव, लग्न देव यादव, मोहम्मद शकील, गोपाल सिंह, रवि चौबे, काली पदो रवाणी ,महेश प्रसाद, संजय निषाद ,रंजय सिंह ,सुनील कुमार राय, वीरेंद्र बाउरी ,प्रदीप राय, रामचंद्र पासवान ,पुष्पा धोबी, सतनारायण चौहान ,रंजीत नोनिया ,दिलीप सिंह भुवनेश्वर सिंह, प्रेम सिंह ,पवन झा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

Edited By: Atul Singh