जागरण संवाददाता, धनबाद : विश्वविद्यालय और कालेजों के काम अब रूटीन नहीं है बल्कि तकनीकी हो चुके हैं। बारीकी से अध्ययन कर मापदंड के अनुसार डीपीआर बनाने होंगे। ऐसी जानकारी मिली है कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के पहले चरण में विश्वविद्यालय को सिर्फ दो करोड़ रुपये मिले थे। दूसरे चरण में राशि मिली ही नहीं थी। इसलिए तकनीकी सत्र को गंभीरता से लें और संस्थागत विकास प्लान आइडीपी को सभी कालेज ध्यानपूर्वक और अभिरुचि के साथ बनाएं ताकि कालेजों के संपूर्ण विकास के लिए फंड की कमी न रहे। यह कहना था उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त सह बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति कमल जॉन लकड़ा का। वह मंगलवार को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान 3.0 के कार्यान्वयन को लेकर पीके राय कालेज में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत कालेजों को अप टू डेट करने के लिए फंड उपलब्ध कराया जाता है। अभियान के 3.0 की के कार्यान्वयन को लेकर कालेजों को संस्थागत विकास योजना तैयार करना होगा। इसी उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग की ओर से विवि और कालेजों में कार्यशाला आयोजन कराए जा रहे हैं। कालेजों से मिलने वाले संस्थागत विकास योजना के तहत फंड उपलब्ध कराए जाएंगे।

मानव संसाधन विभाग रांची की उप निदेशक सह रूसा की स्टेट नोडल पदाधिकारी डा. विभा पांडेय और प्रोजेक्ट कंसल्टेंट वरूणा दत्ता ने संस्थागत विकास योजना की बारीकियों की विस्तृत जानकारी दी। कालेज के सर्वांगीण विकास और छात्र-छात्राओं में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का जिक्र कर आधारभूत संरचना विस्तार की बात कही। इसके साथ ही राज्य में उच्च शिक्षा की मौजूदा स्थिति को भी प्रेजेंटेशन के माध्यम से दर्शाया। कालेजों में आधारभूत संरचना विकास में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान की भूमिका से भी रूबरू कराया। कार्यक्रम में बीबीएमकेयू की डीएसडब्ल्य डा. देवयानी विश्वास, प्रभारी रजिस्ट्रार सह विवि के राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के समन्वयक डा. धनंजय सिंह, सीसीडीसी डा. डीके गिरि, वित्तीय सलाहकार संजय कुमार वर्मा, पीके राय कालेज के प्राचार्य डा. बीके सिन्हा, कालेज के राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के समन्वयक डा. मंतोष पांडेय समेत सभी कालेजों के प्राचार्य उपस्थित थे।

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