पहले रांची में स्टेशन से मिले थे दुर्लभ सांप, अब धनबाद में दून एक्सप्रेस से विशेष प्रजाति के 78 कछुए जब्त
धनबाद रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ और सीआईबी की संयुक्त टीम ने दून एक्सप्रेस से 78 जीवित कछुए बरामद किए हैं। तस्कर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए।

यह कार्रवाई 'ऑपरेशन वाइलेप' के तहत की गई।
HighLights
धनबाद स्टेशन पर दून एक्सप्रेस से 78 जीवित कछुए बरामद हुए।
आरपीएफ और सीआईबी टीम ने 'ऑपरेशन वाइलेप' के तहत कार्रवाई की।
तस्कर फरार हुए, कछुए वन विभाग को सौंपे गए।
जागरण संवाददाता, धनबाद। धनबाद रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ और सीआईबी की संयुक्त टीम ने आपरेशन वाइलेप के तहत एक्सप्रेस) के जनरल कोच से 78 जीवित कछुए बरामद किए हैं। आरपीएफ द्वारा जब्त किए गए कछुए इंडियन फ्लैपशैल प्रजाति के है।
हालांकि इस कार्रवाई के दौरान तस्करों ने पुलिस को चकमा दे कर निकल गए। घटना के बारे में बताया जा रहा है वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त के निर्देशन और धनबाद पोस्ट प्रभारी के नेतृत्व में गठित कार्य दल तथा सीआईबी की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर 11-12 सितंबर की रात करीब 02:30 बजे धनबाद स्टेशन पर पहुंची दून एक्सप्रेस के में सघन जांच अभियान चलाया।
कोच में लावारिस पड़े दो थैले और दो पिट्ठू बैग मिलने पर जब यात्रियों से पूछताछ की गई, तो किसी ने भी उन पर अपना मालिकाना हक नहीं जताया। बैग के भीतर जूट के बोरों में हलचल देखकर अधिकारियों को कछुए होने का संदेह हुआ।
जवानों ने बैगों को सुरक्षित उतारा। बैगों की तलाशी लेने पर एक सफेद कपड़े के थैले से 31, पिट्ठू बैग से 16, पिट्ठू बैग से 19 और नीले बैग से 12 कछुए मिले। आरपीएफ ने नियमानुसार जब्ती की प्रक्रिया पूरी करते हुए सभी कछुओं को आरपीएफ पोस्ट लाया।
इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए इन्हें वन विभाग को सौंप दिया गया है। इस सफल कार्रवाई में उप निरीक्षक मनीषा कुमारी, सहायक उप निरीक्षक शिवजी राय, प्रधान आरक्षी बाबुलेश कुमार, आरक्षी संजीव कुमार और सीआईबी के आरक्षी अमित कुमार वर्मा शामिल थे।
वन्यजीव तस्करी पर प्रमुख खतरा
लुप्तप्राय प्रजातियों के कछुओं और सांपों की अवैध तस्करी भारतीय उपमहाद्वीप में एक गंभीर और संगठित वन्यजीव अपराध बन गई है।
- तस्करी के मुख्य मार्ग: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के रास्ते इन जीवों को पूर्वोत्तर राज्यों और पड़ोसी देशों (जैसे बांग्लादेश और म्यांमार) तक पहुंचाया जाता है।
- मांग के कारण: पारंपरिक चिकित्सा, अवैध पेट ट्रेड (पालतू जानवर के रूप में रखना), और अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में मांस की मांग के कारण इनकी तस्करी बड़े पैमाने पर होती है।
- प्रमुख प्रजातियां: कछुओं में 'इंडियन फ्लैपशैल' और 'स्टार टॉर्टोइज', तथा सांपों में कई दुर्लभ और विषैले अजगर तस्करों के मुख्य निशाने पर रहते हैं।
- कानूनी कार्रवाई: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act, 1972) के तहत इन जीवों की खरीद-फरोख्त, परिवहन या अपने पास रखना एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें कड़े कारावास का प्रावधान है।
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