धनबाद, [आशीष सिंह]। देश के नंबर वन प्रदूषित शहरों में शुमार झरिया यूं ही इस पायदान पर नहीं पहुंचा है। नियमों का उल्लंघन इसका बड़ा कारण है। बात कचरे की करते हैं, शहर से प्रतिदिन 500 टन सभी प्रकार का कचरा निकलता है। इसमें 300 टन प्रतिदिन सूखा एवं गीला कचरा और 21 टन प्रतिदिन प्लास्टिक कचरा शामिल है। प्लास्टिक कचरा भी आम कचरे (सूखा-गीला) के साथ डंप किया जा रहा है। धनबाद मुख्यालय से 11 किमी दूर झरिया के बनियाहीर में यह कचरा डंप किया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों से यही हो रहा है।

अभी तक यहां 22 हजार 995 टन प्लास्टिक डंप किया जा चुका है। यह अभी भी बदस्तूर जारी है। शहर से कचरा उठाने वाली एजेंसी रैमकी यहां कचरा डंप कर रही है। प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट अधिनियम 2016 के तहत इसका सेग्रीगेट करना है, कटिंग करनी है और इसे रीसाइकिल के लिए भेजना है। इसका नतीजा यह निकल रहा है कि बनियाहीर मृदा, जल और वायु प्रदूषण की जद में आ चुका है। बनियाहीर की लाखों की आबादी प्लास्टिक से होने वाले नुकसान से प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों की मानें तो जमीन बंजर होने के कगार पर है। प्लास्टिक की वजह से मृदा में मौजूद सूक्ष्म जीव मर जाते हैं। आसपास के जलस्त्रोत भी प्रदूषित हो जाते हैं।  

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए नहीं मिल रही जमीन

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए नगर निगम को जमीन नहीं मिल रही है। बीसीसीएल के पुटकी में 38 एकड़ जमीन नहीं मिलने के कारण सफाई करने वाली एजेंसी ए टू जेड ने काम छोड़ दिया था। पिछले वर्ष सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए रैमकी एजेंसी से करार हुआ। तय हुआ कि प्लांट के लिए सिंदरी में 90 एकड़ जमीन दी जाएगी। हालांकि अभी तक जमीन नहीं मिल सकी। पिछले दिनों केंद्रीय उर्वरक मंत्री से भी गुहार लगाई गई। अब एफसीआइ ने जमीन स्थानांतरण देने के एवज में 300 करोड़ रुपये मांग लिया है।

संबंधित अधिकारियों ने क्या कहा :

  • सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए सिंदरी में जमीन प्रस्तावित है। उर्वरक मंत्री से मिलकर जमीन मांगी गई। निगम क्षेत्र में सर्किल रेट पर जमीन लेने का प्रावधान है। सिंदरी में सर्किल रेट काफी कम है। जिस जमीन को एफसीआइ 300 करोड़ की बता रही है, उसकी कीमत महज 12 से 13 करोड़ रुपये है। इस मामले में एफसीआइ प्रबंधन व नगर विकास सचिव से बातचीत की जा रही है। रही बात बिना सेग्रीगेट कचरा डंप करने की तो इसकी जांच कराएंगे। - चंद्रशेखर अग्रवाल, मेयर धनबाद
  • प्लास्टिक नॉन-बायोडीग्रेडेबल होते हैं। यह मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी खत्म करता है, क्योंकि इसके जलने से जहरीली गैस निकलती है। अधिक वक्त बीत जाने के बाद प्लास्टिक माइक्रोप्लास्टिक में बदल जाते हैं। प्लास्टिक के रोकथाम में बोर्ड निगम का सहयोग कर सकता है, लेकिन कार्रवाई का अधिकार प्राप्त नहीं है। - आरएन चौधरी, क्षेत्रीय पदाधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

Posted By: Sagar Singh

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