जागरण संवाददाता, बोकारो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Narendra Modi) देश में उड़ान योजना ( UDAN scheme) के तहत हवाई सेवा को सर्व सुलभ बनाने में जुटे हए हैं। इसके लिए देश के विभिन्न प्रदेशों की राजधानी के अलावा छोटे और बड़े शहरों में भी तेजी से एयरपोर्ट का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री ने अभी हाल ही में नई दिल्ली से सटे यूपी के जेवर में एक बड़ा हवाईअड्डा निर्माण का शिलान्यास किया। झारखंड में राजधानी रांची के अलावा बोकारो, जमशेदपुर, पलामू, दुमका और देवघर से हवाई सेवा शुरू करने के लिए हवाईअड्डा का काम चल रहा है। देवघर में तो इंटरनेशल हवाईअड्डा ( Deoghar International Airport) बनकर तैयार है। यहां से जल्द ही हवाई सेवा शुरू होगी। इसका शिलान्यास प्रधानमंत्री ने साढ़े तीन साल पहले 25 मई, 2018 को किया था। बोकारो से हवाई सेवा शुरू करने के लिए सेल के हवाईअड्डा ( Bokaro Airport) को विकसित किया जा रहा है। तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। इसके बावजूद हवाई सेवा शुरू नहीं हो रही है। इससे लोगों में निराशा का भाव है।

राउरकेला और वर्णपुर जैसा हो सकता बोकारो का हाल

बोकारो हवाई अड्डे से उड़ान प्रारंभ होने में अभी कम से कम छह माह से एक वर्ष का समय लगेगा। वह भी तब जब SAIL, झारखंड सरकार व एयरपोर्ट अथारिटी के अधिकारी चाहेंगे। यदि इन तीनों में से कोई भी सुस्त हुआ तो बोकारो हवाई अड्डे का हाल राउरकेला ( Rourkela) के हवाई अड्डे की तरह होगा जहां लाईसेंस मिलने के बाद  भी चालू नहीं हो सका। यही हाल वर्णपुर (Burnpur) का है। यहां का हवाई अड्डा अब तक नहीं चालू हुआ। वजह यह है कि तीनों हवाई अड्डे का एमओयू दिल्ली में एक साथ हुआ था।

उड़ान शुरू करने के लिए सिर्फ तीन काम शेष

25 नवंबर को एएआई, सिविल के संयुक्त महाप्रबंधक अशोक विश्वास ने बोकारो हवाई अड्डे के चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने काम में तेजी लाने के लिए कई निर्देश भी दिए। रांची एयरपोर्ट के निदेशक बिनोद शर्मा ने कहा कि काम लगभग फाइनल स्टेज पर है। आखिरी में बस तीन काम बचा हुआ है। फायर स्टेशन, एप्रोच रोड और रन एंड सेफ्टी एरिया का निर्माण जो अब खत्म होने वाला हैं। हम 31 जनवरी, 2022 तक निर्माण कार्य किसी भी कीमत पर पूरा कर लेंगे। बैठक में बोकारो स्टील की ओर से लक्ष्मी दास, एएआई की प्रियंका शर्मा व संबंधित संवेदक उपस्थित थे।

बोकारो हवाई अड्डे को चालू करने में नहीं है किसी की रूचि

बोकारो के स्थानीय अधिकारियों की प्राथमिकता सूची में हवाई अड्डा है ही नहीं। प्रोजेक्ट ढाई साल देर से चल रहा है। एयरपोर्ट के अधिकारी हवाई अड्डा का काम पूरा होने की बात जनवरी से कर रहे थे। 2021 का अंत हो गया अब भी कम से कम तीन माह से अधिक समय लगेगा। खास बात यह है कि बोकारो स्टील की ओर से लाईसेंस का आवेदन अब तक नहीं दिया गया है। चूंकि हवाई अड्डा के लाईसेेस जुड़ा हुआ काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त चर्चा इस बात की है कि केन्द्र सरकार इसलिए सक्रिय नहीं है कि राज्य में दूसरे दल की सरकार है। झारखंड सरकार व अधिकारियों को इस लिए मतलब नहीं है कि बनने के बाद दिल्ली से उद्घाटन हो जाएगा। सो बोकारो वासियाें को हवाई सेवा का लाभ मिलेगा या नहीं यह पक्का नहीं है। वर्तमान में एक पेंच हवाई पट्टी को लेकर है। बोकारो हवाई अड्डा 1671 मीटर लंबा है। लेकिन थ्रेशोल्ड पॉइंट कम करने के बाद ऑपरेशनल रनवे 1500 मीटर रहेगा। इसकी मंजूरी के लिए फाइल एएआई हेडक्वार्टर, दिल्ली भेजा गया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद उसे एरोड्रम लाइसेंस वाले कागज़ात में दर्शाते हुए आवेदन किया जायेगा।

हवाई सेवा शुरू करने में देरी की पांच प्रमुख वजह

  1. एयरपोर्ट ऑथिरिटी के अधिकारियों की इस प्रोजेक्ट में नहीं है रूचि ।
  2.  सेल के अधिकारी भी दो वर्षों तक नहीं हुए सक्रिय, अब भी नहीं है रूचि ।
  3. केन्द्र व राज्य में अलग-अलग सरकार के प्रतिनिधियों में क्रेडिट को लेकर उहापोह की स्थिति।
  4. बोकारो जिला प्रशासन व राज्य सरकार के अधिकारियों की प्राथमिकता सूची में नहीं है बोकारो हवाई अड्डा।
  5. बोकारो विधायक को क्रेडिट न मिल जाय, इस बात को लेकर भाजपा और भाजपा के बाहल के दलों में विरोध।

क्या है उड़ान योजना

भारत सरकार ने उड़ान योजना को बढ़ावा देने के लिए  21 अक्तूबर को उड़ान दिवस घोषित किया है, इसी दिन इस योजना से संबंधी दस्तावेज़ पहली बार जारी किये गए थे। उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) को 2016 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत एक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) के रूप में शुरू किया गया था।

उद्देश्य: क्षेत्रीय विमानन बाज़ार का विकास करना। छोटे शहरों में भी आम आदमी को क्षेत्रीय मार्गों पर किफायती, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और लाभदायक हवाई यात्रा की सुविधा प्रदान करना।

विशेषताएं

  • इस योजना में मौजूदा हवाई पट्टियों और हवाई अड्डों के पुनरुद्धार के माध्यम से देश के असेवित और कम सेवा वाले हवाई अड्डों को कनेक्टिविटी प्रदान करने की परिकल्पना की गई है। यह योजना 10 वर्षों की अवधि के लिये परिचालित है।
  • कम सेवा वाले हवाई अड्डे वे होते हैं जिनमें एक दिन में एक से अधिक उड़ानें नहीं होती हैं, जबकि अनारक्षित हवाई अड्डे वे होते हैं जहाँ कोई परिचालन नहीं होता है।
  • केंद्र, राज्य सरकारों और हवाई अड्डा संचालकों की ओर से चयनित एयरलाइंस को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है ताकि असेवित तथा कम सेवा वाले हवाई अड्डों से संचालन को प्रोत्साहित किया जा सके एवं हवाई किराए को किफायती रखा जा सके।

अब तक की उपलब्धियां

  • अब तक 387 मार्गों और 60 हवाई अड्डों का संचालन किया जा चुका है, जिनमें से 100 मार्ग अकेले उत्तर-पूर्व के हैं।
  • कृषि उड़ान योजना के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र के निर्यात अवसरों को बढ़ाने के लिये 16 हवाई अड्डों की पहचान की गई है, जिससे माल ढुलाई और निर्यात में वृद्धि जैसे दोहरे लाभ प्राप्त हो रहे हैं।

उड़ान 1.0: इस चरण के तहत 5 एयरलाइन कंपनियों को 70 हवाई अड्डों (36 नए बनाए गए परिचालन हवाई अड्डों सहित) के लिये 128 उड़ान मार्ग प्रदान किये गए।

उड़ान 2.0: वर्ष 2018 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 73 ऐसे हवाई अड्डों की घोषणा की जहाँ कोई सेवा प्रदान नही की गई थी या उनके द्वारा की गई सेवा बहुत कम थी। उड़ान योजना के दूसरे चरण के तहत पहली बार हेलीपैड भी योजना से जोड़े गए थे।

उड़ान 3.0: पर्यटन मंत्रालय के समन्वय में उड़ान 3.0 के तहत पर्यटन मार्गों का समावेश। जलीय हवाई अड्डे को जोड़ने के लिये जल विमान का समावेश। पूर्वोत्तर क्षेत्र में कई मार्गों को उड़ान के दायरे में लाना।

उड़ान 4.0: वर्ष 2020 में देश के दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिये क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (उड़ान) के चौथे संस्करण के तहत 78 नए मार्गों के लिये मंज़ूरी दी गई थी।

लक्षद्वीप के मिनिकॉय, कवरत्ती और अगत्ती द्वीपों को उड़ान 4.0 के तहत नए मार्गों से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

उड़ान 4.1: इसके तहत मुख्यतः छोटे हवाई अड्डों, विशेष तौर पर हेलीकॉप्टर और सी-प्लेन मार्गों को जोड़ने पर केंद्रित है। सागरमाला विमान सेवा के तहत कुछ नए मार्ग प्रस्तावित हैं। सागरमाला सी-प्लेन सेवा संभावित एयरलाइन ऑपरेटरों के साथ पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है, जिसे अक्तूबर 2020 में शुरू किया गया था।

Edited By: Mritunjay