गिरिडीह [ दिलीप सिन्हा ]। सीबीआइ (CBI) की विशेष अदालत ने कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे और अन्य को तीन साल की सजा सुनाई गई  है। अदालत ने आरोपियों को एक लाख के मुचलके पर जमानत दे दी है। यह सजा झारखंड के गिरिडीह के ब्रह्मणडीहा कोल ब्लॉक आवंटन के मामले में सुनाई गई है। ब्रह्मणडीहा कोल ब्लॉक का आवंटन भाजपा के तत्कालीन राज्यसभा सदस्य परमेश्वर अग्रवाल के भाई महेंद्र कुमार अग्रवाल के नाम हुआ था।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य के भाई के नाम हुआ था कोल ब्लॉक का आवंटन

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य दिवंगत परमेश्वर कुमार अग्रवाल के भाई महेंद्र कुमार अग्रवाल की कंपनी कैस्ट्रोन टेक्नोलॉजी लिमिटेड(सीटीएल) एवं कैस्ट्रोन माइनिंग लिमिटेड(सीएमएल) ने जिन शर्तो के साथ ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक का आवंटन लिया था, उसका बुरी तरह से उल्लंघन किया था। यही कारण है कि अदालत ने इस कंपनी के निदेशक महेंद्र कुमार अग्रवाल के साथ-साथ तत्कालीन कोयला राज्य मंत्री दिलीप रे एवं कोल इंडिया के दो बड़े अधिकारियों को आपराधिक साजिश में दोषी करार देने के बाज सजा सुनाई है।

शिकायत के बाद सीबीआइ ने की जांच

सीटीएल एवं सीएमएल को भारत सरकार ने इस शर्त के साथ ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक का आवंटन किया था कि वे पावर प्लांट खोलेंगे। यहां उत्पादित कोयला से वे अपना पावर प्लांट चलाएंगे। जब तक कंपनी पावर प्लांट चालू न कर दे तब वह यहां का कोयला पतरातू थर्मल पावर स्टेशन(पीटीपीएस) को आपूर्ति करेगी। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनपी सिंह बुल्लू ने बताया कि कंपनी ने इन दोनों शर्तों में से किसी का भी पालन नहीं किया। इसकी शिकायत भारत सरकार तक गई। इसके बाद सीबीआइ जांच शुरू हुई। सीबीआइ ने कंपनी द्वारा उत्पादित करीब 20 से 25 हजार टन कोयला जब्त कर लिया।

सरकार ने वर्ष 1999 में किया था आवंटन

अग्रवाल बंधुओं को भारत सरकार ने वर्ष 1999 में ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक का आवंटन किया था। ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक गिरिडीह जिला मुख्यालय से मात्र चार किमी. दूर एवं सीसीएल लीज एरिया बनियाडीह से बिल्कुल सटा हुआ है। सभी तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद कंपनी ने यहां वर्ष 2004 में मापी का काम शुरू किया। 2006 में उत्पादन शुरू हुआ। करीब एक से डेढ़ साल उत्पादन होने के बाद सीबीआइ ने कोयला जब्त कर जांच शुरू कर दी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आवंटन में गड़बड़ियों के कारण ब्रम्हडीहा समेत कई कोल ब्लाक का आवंटन रद कर दिया।

सरकार ने फिर की है नीलामी, आधा दर्जन कंपनी है रेस में

सीबीआइ जांच शुरू होने के बाद से ही ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक में कामकाज पूरी तरह से ठप है। यहां वीरानी छाया हुआ है। इस बीच भारत सरकार ने ब्रम्हडीहा समेत देश के 19 कोल ब्लाकों की नीलामी पिछले महीने की है। ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक की नीलामी में देश की छह कंपनियों ने भाग लिया है। सरकार ने अभी नीलामी फाइनल नहीं की है। एवरडेलीवर लोजेस्टिक प्राइवेट लिमिटेड, द आंध्रप्रदेश मिनरल डेवलपमेट कारपोरेशन लिमिटेड, भूपति माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, अलंकार ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड, श्री जगदम्बा कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड एवं गंगारामचक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक के आवंटन के लिए टेंडर डाला है।

सीबीआइ ने किया जब्त, दो हजार टन उठाकर ले गए तस्कर

ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक से सीबीआइ ने करीब 20 से 25 हजार टन कोयला जब्त किया था। सीबीआइ द्वारा जब्त इस कोयला में से करीब दो हजार टन कोयला पिछले चार महीने के दौरान तस्कर उठाकर ले गए थे। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सीबीआइ के निदेशक को पत्र लिखकर कहा था कि राजनीतिक संरक्षण में सीबीआइ द्वारा जब्त कोयला की लूट हुई है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।

कोल ब्लाक पर कब्जे को लेकर चली थी गोली 

ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक का आवंटन भले ही महेंद्र कुमार अग्रवाल की कंपनी के नाम से हुआ था लेकिन इसकी पूरी व्यवस्था परमेश्वर अग्रवाल संभाल रहे थे। बाद में दोनों भाइयों के बीच विवाद हुआ और इस कोल ब्लाक पर कब्जे की लड़ाई शुरू हुई थी। यहां तैनात सुरक्षाकर्मी परमेश्वर अग्रवाल के थे। गार्डों पर गोली चली थी। आरोप लगा था कि महेंद्र अग्रवाल के खेमे से फायरिंग की गई।

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बिना वेतन के 48 गार्ड कर रहे सीबीआइ के कोयले की रक्षा

ब्रम्हडीहा कोल ब्लाक में अग्रवाल बंधुओं ने सुरक्षा के लिए 48 कर्मियों को बहाल किया था। अग्रवाल बंधुओं ने मार्च 2014 तक इन गार्डों को वेतन दिया। इसके बाद से आज तक उन्हें वेतन नहीं मिला है। सीबीआइ द्वारा जब्त कोयला की ये दिन-रात रक्षा कर रहे हैं। ड्यूटी पर तैनात मो. शादाब, नौशाद एवं मो. बशीर ने बताया कि अप्रैल 2014 से उन्हें वेतन नहीं मिला है। सीबीआइ ने यहां करीब 15 से 20 हजार टन कोयला जब्त किया है। किसके भरोसे वे इसे छोड़ दे। सीबीआइ के अधिकारियों ने बताया था कि जब किसी नई कंपनी को यहां काम मिलेगा, तो उससे वेतन दिलाने की कोशिश होगी। मो. बशीर ने बताया कि अग्रवाल बंधुओं में जब कब्जे की लड़ाई हुई थी, तो उस पर गोली चली थी। सौभाग्य से गोली उसके कान के पार से गुजर गई थी। इस कारण आज भी उसे कम सुनाई पड़ती है।

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