धनबाद, जेएनएन। Raid in Dhanbad jail झारखंड की जेलों में बंद बड़े-बड़े अपराधी अंदर से ही अपराध की योजना बना रहे हैं। जेल में बैठे-बैठे मोबाइल फोन से फिराैती मांग कर रहे हैं। बाहर में माैजूद अपने गुर्गों के माध्यम से संगीन अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। इससे पुलिस-प्रशासन परेशान है। जेल में बंद अपराधियों की नकेल कसने के लिए बुधवार को धनबाद, गिरिडीह सेंट्रल जेल और कोडरमा जेल समेत झारखंड की कई जलों में एक साथ छापेमारी हुई। धनबाद जेल में तो चार दिन के अंदर बुधवार को दूसरी बार पुलिस-प्रशासन ने छापा मारा। 18 अक्टूबर को भी धनबाद जेल में छापेमारी हुई थी। करीब दो घंटे तक चले छापेमारी में पुलिस-प्रशासन के अधिकारी बाहर निकले तो उनके हाथ खाली थे। मोबाइल के बदले सिर्फ मोबाइल नंबर मिले थे।

धनबाद जेल में बुधवार की दोपहर 12:15 बजे डीसी उमाशंकर सिंह और एसएसपी असीम विक्रांत मिंज के नेतृत्व में छापामारी की गई। इस छापामारी के लिए कुल 5 टीम गठित की गई है। इसमें पुलिस अधिकारियों के अलावा दंडाधिकारी भी शामिल किए गए हैं। डीसी उमाशंकर सिंह और एसपी असीम विक्रांत मिंज पूरे दलबल के साथ अचानक मंडल कारा धनबाद पहुंचे। अधिकारियों की टीम को देखते ही मुख्य दरवाजा तुरंत खोल दिया गया। टीम अंदर प्रवेश करते हैं वार्डो के निरीक्षण में जुट गई। जेल का मुख्य दरवाजा भी बिना देरी के ही खोल दिया गया।

बीते सोमवार को भी अधिकारियों की टीम ने मंडल कारा धनबाद में छापामारी की थी। इस दौरान एक मोबाइल फोन एवं अन्य नशीला पदार्थ बरामद किया गया था। ठीक 2 दिनों के अंदर दूसरी बार छापामारी से जेल में हड़कंप मचा हुआ है। छापामारी के लिए भारी संख्या में पुलिस बल मंडल कार्य के अंदर गई है। महज एक दिन पूर्व डीसी सिंह ने जेल अधिकारियों को चेतावनी दी थी। टीम में डीसी, एसएसपी के अलावा सिटी एसपी, एसडीएम, ट्रैफिक डीएसपी, डीएसपी मुख्यालय एक व दो, एडीएम, पांच दंडाधिकारी और पांच थाना के इंस्पेक्टर शामिल हैं।

छापामारी में जेल के अंदर बंदियों के पास से 6 हजार रुपये और आधा दर्जन मोबाइल नंबर मिले। सोमवार को भी हुई छापेमारी के दाैरान पुलिस को मोबाइल नहीं मिले। 

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