गोड्डा [ विधु विनोद ]। गोड्डा के भूमि संरक्षण विभाग में चारा घोटाले की तरह कारनामा किया गया है। जिस तरह बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले में बाइक और स्कूटर में कई टन चारा की ढुलाई की बात सामने आई थी, उसी तरह गोड्डा के सदर प्रखंड के महुआटांड़ गांव में स्कूटी, बाइक एवं बोलेरो से तालाब की खुदाई की गई है। सुंडमारा के अजीत कुमार ने सूचनाधिकार कानून के तहत इस तालाब की खुदाई में उपयोग की गई मशीन एवं वाहनों के नंबर मांगे थे। तालाब खुदाई से लेकर मिïट्टी ढुलाई के कार्य में उपयोग किए गए 26 मशीन एवं वाहनों के नंबर दिए गए। मोटर व्हीकल एप पर सारे नंबरों की परखा गया तो वे स्कूटी, बाइक, बोलेरो जैसी गाडिय़ों के मिले। अजीत कुमार बोले कि अब मामला खुलने लगा है तो सरकारी अधिकारी चुप रहने के लिए उन पर दबाव बना रहे हैं। 

अजीत कुमार को सूचना मिली थी कि भूमि संरक्षण विभाग द्वारा गोड्डा सदर प्रखंड के महुआटांड़ गांव में तालाब की खुदाई में गड़बड़ी हो रही है। उन्होंने सूचनाधिकार कानून की मदद लेने का फैसला लिया। आवेदन देना शुरू किया। आखिरकार भूमि संरक्षण विभाग के रांची मुख्यालय से उन्हें कई सूचनाएं मिल गईं। सूचना में ऐसे 26 मशीन एवं वाहनों के नंबर दिए गए थे जिनका उपयोग तालाब की खुदाई में हुआ था। मोटर व्हीकल एप के जरिए मशीन एवं वाहन नंबर को परखने के बाद साफ हो गया कि गलत दस्तावेज देकर विपत्र का भुगतान कराया गया है।

चार साल में गोड्डा में तालाब बनाने की 70 योजनाएं

भूमि संरक्षण विभाग से गोड्डा जिले में चार साल में तालाब बनाने की 70 योजनाएं ली गई हैं। 2015-16 से 2018-19 तक 12.6 करोड़ रुपये तालाब बनाने में खर्च किए गए हैं। एक तालाब बनाने में औसतन 18 लाख रुपये का प्राक्कलन बनाया गया है। तालाबों का निर्माण लाभुक समिति के जरिए कराया गया है।

प्राक्कलन के मुताबिक खुदाई नहीं कर लिया भुगतान

भूमि संरक्षण विभाग से बनने वाले तालाबों में प्राक्कलन के मुताबिक खुदाई नहीं कर भुगतान लेने की बात भी सामने आ रही है। शिकायत यह भी है कि पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार कर उन्हें नया दिखाया गया। तालाब बनाने की निविदा में गोलमाल में भूमि संरक्षण विभाग के एक चेनमैन की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

तालाब की लंबाई, चौड़ाई और गहराई की पैमाइश पर मापी पुस्तिका के आधार पर योजना के विरुद्ध राशि का भुगतान किया जाता है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए अलग से व्यवस्था है। एक साल पहले गोड्डा जिले का प्रभार लिए हैं। उनके कार्यकाल में ऐसी गड़बड़ी होने का मामला संज्ञान में नहीं आया है।

-रामानंद प्रसाद सिंह, भूमि संरक्षण पदाधिकारी, गोड्डा।

एम परिवहन एप से किसी भी वाहन नंबर के बारे में पड़ताल की जा सकती है। 26 मशीन और वाहन के नंबर स्कूटी एवं बाइक के निकले हैं तो जरूर गंभीर मसला है। भूमि संरक्षण विभाग नंबर देगा तभी भौतिक सत्यापन किया जा सकेगा। 

-मनोज कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी, गोड्डा।

Posted By: Mritunjay

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