धनबाद : कॉमर्शियल माइनिंग के खिलाफ कोयला उद्योग में गुरुवार को पहली पाली से हड़ताल रहेगी। हड़ताल टालने की अंतिम कोशिश भी विफल रही। बुधवार अपराह्न तीन से 4:20 बजे तक सभी ट्रेड यूनियनों के केंद्रीय नेताओं के साथ कोयला मंत्री की वर्चुअल मीटिंग हुई। हालांकि इसका कोई लाभ नहीं हुआ। ट्रेड यूनियन नेता अपनी बात पर अड़े रहे।

वार्ता में भारत सरकार की ओर से कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी, कोयला सचिव अनिल जैन, कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल, कार्मिक निदेशक आरपी श्रीवास्तव और कोयला मंत्रालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भारतीय मजदूर संघ के डॉ. बीके राय, एचएमएस के नाथूलाल पांडेय, सीटू के डीडी रामानंदन व एटक के रामेंद्र कुमार भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में कोयला मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति कोल इंडिया को मजबूत करने की है। देश में कोयले की जरूरत को पूरा करने और आयात कम करने के लिए सरकार ने कॉमर्शियल माइनिंग की नीति अपनाई है। मंत्री ने अनुरोध किया कि कोरोना संकट और देश की खराब आर्थिक हालत को देखते हुए हड़ताल वापस ली जानी चाहिए। कॉमर्शियल माइनिंग वापस लेने पर अड़े मजदूर नेता : ट्रेड यूनियनों की ओर से कहा गया कि सरकार कोयला उद्योग को फिर से राष्ट्रीयकृत के पहले की स्थिति में ले जाना चाहती है। यह कोयला मजदूरों को मंजूर नहीं। जब तक सरकार कॉमर्शियल माइनिंग की नीति को वापस नहीं लेती हड़ताल वापस नहीं होगी। यह भी कहा कि प्रमाणित हो गया है कि कॉमर्शियल माइनिंग से देश में कोयले का उत्पादन नहीं बढ़ाया जा सकता। ट्रेड यूनियनों की ओर से यह तर्क दिया गया कि 2015 से अबतक 112 कोल ब्लॉक सरकार आवंटित कर चुकी है। ये सभी ब्लॉक मिलकर अबतक केवल लगभग 35 मिलियन टन का उत्पादन कर पा रहे हैं। कोयला मजदूर कॉमर्शियल माइनिंग की नीति के खिलाफ आक्रोशित हैं। इसके साथ ही वार्ता समाप्त हो गई। सभी श्रमिक नेताओं ने कोयला मजदूरों से तीन दिन की हड़ताल को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का आह्वान किया है।

Posted By: Jagran

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